किसानों तक सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए उर्वरक विक्रेताओं का 15 दिवसीय महा-प्रशिक्षण शुरू


बीकानेर, 19 जनवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, लूणकरणसर में सोमवार से एक महत्वपूर्ण 15 दिवसीय उर्वरक विक्रेता प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ हुआ। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) के प्रबंधकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे किसानों के लिए एक सही मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकें।


उर्वरक विक्रेता: कृषि विकास की महत्वपूर्ण कड़ी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने कहा कि उर्वरक विक्रेता और जीएसएस प्रबंधक सीधे तौर पर किसानों से जुड़े होते हैं। वे वैज्ञानिक खेती और सटीक सूचनाओं को किसानों तक पहुँचाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यह प्रशिक्षण न केवल विक्रेताओं के ज्ञानवर्धन में सहायक होगा, बल्कि किसानों को अनावश्यक खर्च से बचाकर संतुलित खेती की ओर प्रेरित करेगा।


मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
इस अवसर पर मृदा वैज्ञानिक डॉ. भगवत सिंह ने ‘मृदा स्वास्थ्य’ और ‘संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन’ पर विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी की उर्वरक शक्ति को कम कर रहा है, इसलिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाना अनिवार्य है। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. आर. के. शिवरान की देखरेख में आयोजित इस शिविर में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 37 उर्वरक विक्रेताओं ने पंजीकरण कराया है।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
- 15 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा:
- उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO): उर्वरकों की बिक्री और वितरण से जुड़े कानूनी नियमों की जानकारी।
- गुणवत्ता पहचान: असली और नकली उर्वरकों की पहचान करने के तरीके।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड: सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर संतुलित खाद का उपयोग।
- सुरक्षित भंडारण: उर्वरकों को सुरक्षित रखने की तकनीक और सुरक्षा उपाय।
कार्यक्रम में विभिन्न जीएसएस के व्यवस्थापकों ने भी सहभागिता की, जिससे जमीनी स्तर पर उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की उम्मीद जगी है।






