गंगाशहर में अष्टम आचार्य श्री कालूगणी का पुण्य दिवस मनाया गया



गंगाशहर, 29 अगस्त। तेरापंथ धर्मसंघ के आठवें आचार्य, पूज्य गुरुदेव श्री कालूगणी का पुण्य दिवस आज तेरापंथ भवन में उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार जी स्वामी के सानिध्य में मनाया गया।
मुनिश्री कमलकुमार ने अपने प्रवचन में बताया कि आचार्य श्री कालूगणी अपनी माता के इकलौते पुत्र थे और बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उन्होंने बताया कि किस तरह साधु-साध्वियों की सेवा से प्रभावित होकर मात्र 10 वर्ष की उम्र में अपनी माता के साथ उन्होंने पूज्य मघवागणी से दीक्षा ग्रहण की।




आचार्य कालूगणी का व्यक्तित्व और योगदान
मुनिश्री ने कहा कि दीक्षा के बाद आचार्य कालूगणी ने अपना पूरा समय अध्ययन और साधना में लगाया। आचार्य बनने के बाद उन्होंने न केवल धर्म का प्रचार-प्रसार किया, बल्कि अनेकों को दीक्षित भी किया। उनके शासनकाल में दीक्षा का अच्छा विकास हुआ, और कई संत तत्वज्ञ, आगमज्ञ और संस्कृतज्ञ बने।


उन्होंने बताया कि आचार्य श्री तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञ जैसे महान संतों को दीक्षित करने वाले आचार्य श्री कालूगणी ही थे। वे अपने शिष्यों के प्रति कभी कठोर तो कभी कोमल अनुशासन का पालन करते थे। इस प्रसंग में मुनिश्री ने शासन श्री गणेशमल जी स्वामी पर हुए कठोर और कोमल अनुशासन का उदाहरण भी सुनाया।