15 साल बाद दिवंगत डिस्ट्रिक्ट जज बी.डी. सारस्वत की बर्खास्तगी रद्द

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हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- परिवार को रिटायरमेंट तक की पूरी सैलरी देने का आदेश

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बीकानेर , 5 नवम्बर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर की डिवीजन बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, दिवंगत जिला न्यायाधीश बी.डी. सारस्वत की 15 साल पुरानी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके साथ ही उनके परिवार को रिटायरमेंट की तारीख तक का पूरा बकाया वेतन और सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया गया है। जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की बेंच ने 3 नवंबर 2025 को सुनाए इस फैसले में कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट गलत सबूतों पर आधारित थी। यह मामला 2004-05 का था, जब सारस्वत प्रतापगढ़ में एनडीपीएस एक्ट के स्पेशल जज थे और उन पर आरोपी पारस की तीसरी जमानत याचिका को अवैध उद्देश्यों से स्वीकार करने का आरोप लगा था, जिसके आधार पर 8 अप्रैल 2010 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था, हालांकि उनकी पत्नी और बच्चों (जो बीकानेर के निवासी हैं) ने उनकी मृत्यु के बाद भी यह कानूनी लड़ाई जारी रखी।

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हाईकोर्ट ने अपने विश्लेषण में न्यायिक कार्रवाई को वैध ठहराया, यह स्पष्ट करते हुए कि जब्त 1.5 किलो अफीम मध्यवर्ती श्रेणी में थी, और सीआरपीसी की धारा 167(2) के अनुसार, जब तीसरी जमानत याचिका दायर की गई, तब तक आरोपी 90 दिन से अधिक (157 दिन) हिरासत में था और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई थी। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि दोषी अधिकारी के पास उस समय वैधानिक (डिफॉल्ट) जमानत देने के अलावा कोई विकल्प या विवेक नहीं था, और वकील बदलने पर जमानत देना किसी अवैध उद्देश्य से प्रेरित नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन था। परिणामस्वरूप, कोर्ट ने जांच रिपोर्ट, फुल कोर्ट का प्रस्ताव और राज्यपाल के बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए, सारस्वत की काल्पनिक बहाली का निर्देश दिया और उनके परिवार को 8 अप्रैल 2010 से 28 फरवरी 2011 (सेवानिवृत्ति की तारीख) तक के पूर्ण वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया।

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