शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने भरी हुंकार; आरपीएससी-86 बैच की पदोन्नति और ऑनलाइन काउंसलिंग सहित 4 सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित


बीकानेर, 12 जनवरी । राजस्थान के शिक्षा विभाग में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सोमवार, 12 जनवरी 2026 को शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा मंत्री सहित उच्चाधिकारियों को चार अलग-अलग ज्ञापन भेजकर मंत्रालयिक संवर्ग की समस्याओं के त्वरित समाधान की पुरजोर मांग की है।


आचार्य ने बताया कि विभाग में सहायक कर्मचारी से लेकर संस्थापन अधिकारी तक के विभिन्न पदों पर वर्ष 2025-26 की नियमित डीपीसी (DPC) और बकाया रिव्यु डीपीसी लंबे समय से लंबित है, जिसे तुरंत करने की आवश्यकता है। ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा आरपीएससी (RPSC) 1986 बैच से चयनित 86 कनिष्ठ लिपिकों का उठाया गया है। संघ का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्णय के बावजूद विभाग के कुछ अधिकारी जानबूझकर इन कर्मचारियों को 2 फरवरी 1990 से पदोन्नति का लाभ देने में अड़चनें पैदा कर रहे हैं। संघ ने ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने विभाग में ‘समानता’ की नीति अपनाते हुए एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है। संघ के अनुसार, जिस प्रकार शैक्षिक संवर्ग (शिक्षकों) के पदस्थापन ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किए जाते हैं, ठीक उसी तर्ज पर मंत्रालयिक संवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के पदस्थापन भी ऑनलाइन काउंसलिंग से ही होने चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
प्रदेशाध्यक्ष ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग और राज्य सरकार ने इन न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो संगठन मजबूरन आंदोलन की राह पकड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी समय में होने वाले किसी भी संगठनात्मक विरोध या कार्य बहिष्कार की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इन ज्ञापनों की प्रतियां शिक्षा निदेशक और समस्त संयुक्त निदेशकों को भी प्रेषित कर कार्रवाई की अपेक्षा की गई है।








