बीकानेर में होम्योपैथी के एक स्वर्णिम युग का अंत, डॉ. झंवरलाल नाहटा का देवलोकगमन


बीकानेर, 17 जनवरी। बीकानेर के चिकित्सा एवं पत्रकारिता जगत के लिए आज का दिन अत्यंत शोकपूर्ण है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रख्यात चिकित्सक, प्रखर विचारक एवं प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘थार एक्सप्रेस’ के वरिष्ठ लेखक डॉ. झंवरलाल नाहटा के देवलोकगमन से शहर ने एक युगद्रष्टा व्यक्तित्व को खो दिया है। उनके निधन से न केवल नाहटा परिवार, बल्कि संपूर्ण बीकानेर के चिकित्सा जगत में ऐसी रिक्तता उत्पन्न हुई है, जिसकी भरपाई असंभव प्रतीत होती है।


कलम और क्लिनिक का अनूठा संगम


डॉ. नाहटा केवल एक कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि विचारशील लेखक और समाजप्रेरक भी थे। वर्षों तक ‘थार एक्सप्रेस’ के माध्यम से उन्होंने होम्योपैथी और स्वास्थ्य विषयों पर जनजागरूकता का कार्य किया। उनके लेख सरल भाषा में जटिल रोगों के समाधान प्रस्तुत करते थे और पाठकों से एक आत्मीय रिश्ता स्थापित करते थे। वे चिकित्सा को केवल उपचार नहीं, बल्कि जीवनशैली मानते थे।।
थार एक्सप्रेस परिवार ने व्यक्त की संवेदना
डॉ. नाहटा के निधन पर ‘थार एक्सप्रेस’ परिवार ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संस्थान के सदस्यों का कहना है कि डॉक्टर साहब का जुड़ाव केवल एक लेखक के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिभावक और मार्गदर्शक के रूप में था। उनके जाने से जो रिक्तता आई है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।
एक युग की समाप्ति
चिकित्सा जगत में अपनी नाड़ी ज्ञान की सिद्धहस्त कला और पत्रकारिता में अपने बौद्धिक योगदान के कारण वे हमेशा याद किए जाएंगे। ‘थार एक्सप्रेस’ परिवार इस दुःख की घड़ी में डॉ. नाहटा के परिजनों, विशेषकर डॉ. पिंटू नाहटा के प्रति संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना करता है।
चिकित्सा जगत की विलक्षण प्रतिभा
चिकित्सा जगत की एक ऐसी शख्सियत, जिन्होंने नाड़ी देखकर मर्ज पहचानने की अपनी सिद्धहस्त कला और ‘रामबाण’ दवाओं से दशकों तक बीकानेर की सेवा की, डॉ. झंवरलाल जी नाहटा आज हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से न केवल नाहटा परिवार, बल्कि बीकानेर के चिकित्सा जगत में एक ऐसी रिक्तता आई है, जिसे भरना असंभव है। वे महज एक चिकित्सक नहीं, बल्कि एक चलते-फिरते संस्थान थे, जिनके सानिध्य में कई जीवन संवरे।
भुजिया बाजार की ‘ज्योति’ और दवाओं का वो अद्भुत कौशल
अस्सी के दशक में भुजिया बाजार की भादानी पिरोल के पास स्थित ‘ज्योति मेडिकल स्टोर’ महज एक क्लिनिक नहीं था, बल्कि वह उम्मीद का केंद्र था। डॉ. झंवरलाल जी में रोगों को पहचानने की अद्भुत क्षमता थी। चेहरे की रंगत, आंखों की सफेदी और नाड़ी की चाल से वे उस बीमारी को पकड़ लेते थे, जिसे बड़ी मशीनें भी नहीं ढूंढ पातीं। वे होम्योपैथी के तो प्रामाणिक हस्ताक्षर थे ही, साथ ही आयुर्वेद और एलोपैथी का भी उन्हें गहरा ज्ञान था।
‘आरएस’ (RS) दवा और वो पुड़िया बनाने का हुनर
डॉक्टर साहब के क्लिनिक की स्मृतियां आज भी कई लोगों के मन में ताजा हैं। उनके द्वारा आविष्कृत ‘आरएस’ (RS) दवा उस दौर में किसी चमत्कार से कम नहीं थी। मिल्क शुगर में दवाओं की सटीक बूंदों का वो तालमेल उनके और उनके विश्वासपात्र सहायकों के अलावा किसी को ज्ञात नहीं था। उनके हाथों से बनी दवा की पुड़िया का आकार और उसका प्रभाव, दोनों ही कला का हिस्सा थे।
डॉ. सी.एल. हर्ष को होम्योपैथी से जोड़ने का ऐतिहासिक प्रसंग
डॉ. नाहटा की विशेषज्ञता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्होंने बीकानेर के प्रसिद्ध एलोपैथी डॉक्टर डॉ. सी.एल. हर्ष को होम्योपैथी का मुरीद बना दिया था। किस्सा बेहद दिलचस्प है; जब डॉ. हर्ष स्वयं दमा (अस्थमा) से ग्रसित थे और इसे लाइलाज मान चुके थे, तब डॉ. झंवरलाल जी ने चुनौती के साथ उनका उपचार किया। जब रिपोर्ट नेगेटिव आई, तो डॉ. हर्ष इतने प्रभावित हुए कि एमबीबीएस होने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन होम्योपैथी को समर्पित कर दिया।
लाइलाज बीमारियों के ‘मसीहा’
मेडिकल साइंस में जहां ‘Azoospermia’ जैसे विकारों को लाइलाज माना जाता है, डॉ. नाहटा ने अपने सफल उपचार से कई परिवारों के आंगन में खुशियां बिखेरीं। उनके पास से ठीक होकर गए मरीज आज भी उनकी कुशलता के गवाह हैं।
विरासत: डॉ. पिंटू नाहटा के रूप में समाज को समर्पण
आज भले ही डॉ. झंवरलाल जी अलविदा कह गए हों, लेकिन उन्हें यह परम संतोष रहा होगा कि उन्होंने अपने पुत्र डॉ. पिंटू नाहटा के रूप में बीकानेर को एक और भरोसेमंद और सेवाभावी चिकित्सक सौंपा है। पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए डॉ पिंटू ने उस परंपरा को जीवित रखा है।
डॉ. नाहटा का जाना बीकानेर के लिए एक युग का अंत है। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके द्वारा स्थापित सेवा और भरोसे के मापदंडों को याद रखें। विनम्र श्रद्धांजलि। (जैन लूणकरण छाजेड़ )








