परिवार में शांति का मूल मंत्र है ‘गुणग्राही’ बनना— मुनि श्री कमल कुमार


गंगाशहर, 18 जनवरी। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आयोजित युवक-युवती कार्यशाला में पारिवारिक सौहार्द और सामंजस्य पर गहन चर्चा हुई। मुख्य प्रवचनकार उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने “कैसे बढ़े परिवार में आपसी सामंजस्य” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि दूसरों के अवगुणों के बजाय उनके गुणों को देखना ही शांति का वास्तविक मार्ग है।


गुणग्राही बनें, कलह से बचें
मुनिश्री ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जिस परिवार में लोग एक-दूसरे की कमियां ढूंढते हैं, वहां कलह और अशांति का वास होता है। उन्होंने ‘गुणग्राही’ बनने पर जोर देते हुए कहा, “दूसरों की अच्छाइयां देखने से मन को शांति मिलती है। हमें अपनी स्वयं की कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का प्रयास करना चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी में बुराई हो, तो उसे सुधारने का प्रयास किया जा सकता है, लेकिन उसे नीचा दिखाना उचित नहीं है।


सारणा, वारणा और चोईरणा का सूत्र
परिवार में संतुलन बनाए रखने के लिए मुनिश्री ने जैन दर्शन के सारणा (सराहना), वारणा (रोकना) और चोईरणा (प्रेरणा) का सूत्र दिया। उन्होंने कहा कि
सराहना: अच्छे कार्यों की खुले मन से प्रशंसा करें।
सुधार: जहां गलती हो, वहां विनम्रता से सुधार का प्रयास करें।
प्रेरणा: परिवार के सदस्यों को निरंतर अच्छे कार्यों की ओर अग्रसर करें।
मौन और संयम का महत्व
पारिवारिक विग्रह की स्थिति, चाहे वह सास-बहू के बीच हो या पिता-पुत्र के, मुनिश्री ने प्रतिक्रिया न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गुस्से की स्थिति में मौन रहना ही सबसे बड़ी शक्ति है। मुनिश्री के अनुसार, “जो समय पर होंठों को सीना जानता है, वह दुनिया में सुख से रहना जानता है।” उन्होंने एक प्रेरक कहानी और गीतिका “घर घर बढे़ परस्पर प्यार, एक दूसरे का भाई करना सीखों सतकार” के माध्यम से प्रेम और सत्कार का संदेश दिया।
आगामी कार्यक्रम: स्कूल शिलान्यास और भजन संध्या
इस अवसर पर मुनि श्री श्रेयांस कुमार जी ने भी मधुर गीतिका के माध्यम से आपसी प्रेम और मधुरता बनाए रखने का आह्वान किया। सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कल आचार्य श्री महाप्रज्ञ अंतरराष्ट्रीय स्कूल का शिलान्यास किया जाएगा। साथ ही, आगामी ‘भिक्षु भजन संध्या’ की तैयारियों के बारे में भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान कौशल्या देवी सांड ने पांच दिवसीय चोविहार तपस्या का प्रत्याख्यान किया।
आज दोपहर में मूलचन्द सुरजमल धीरज कुमार छाजेड़ परिवार में प्रवचन देते हुए मुनिश्री ने व्यसनमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी तथा सूरजमल छाजेड़ ने 201 एकसान करने का संकल्प लेने पर अनुमोदना व्यक्त की। मुनिश्री इससे पहले गोपेश्वर बस्ती में पुष्पचन्द शान्तिलाल नाहटा के यहाँ पर प्रवचन करते हुए सादा जीवन जीने की की प्रेरणा प्रदान की।








