भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए ‘हिंदू संगठन’ अनिवार्य: महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती


बीकानेर, 18 जनवरी। धनीनाथ गिरि मठ पंच मंदिर सहित देशभर के करीब 70 मठों के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती ने सनातन धर्म की रक्षा और भारत के वैश्विक नेतृत्व पर कड़ा संदेश दिया है। रविवार को पंच मंदिर परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत को पुन: विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए हिंदुओं में जाति-पांति के भेदभाव से ऊपर उठकर संगठन और शक्ति का संचार करना अनिवार्य है।


हिंदू सम्मेलन के बैनर का विमोचन और जनसंपर्क अभियान


स्वामी विशोकानंद भारती ने यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मार्कण्डेय नगर के अंतर्गत अम्बेडकर बस्ती द्वारा आयोजित होने वाले विराट हिंदू सम्मेलन के बैनर विमोचन अवसर पर व्यक्त किए। ज्ञात हो कि यह सम्मेलन 31 जनवरी को जस्सूसर गेट के बाहर पाराशर भवन में आयोजित होगा। इस अवसर पर महामंडलेश्वर ने जनसंपर्क अभियान का भी विधिवत शुभारंभ किया।
सनातन धर्म: विश्व का प्राचीनतम संविधान
महामंडलेश्वर ने वेदों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऋग्वेद विश्व के इतिहास का सबसे प्राचीन ग्रंथ है, जो सृष्टि की रचना के समय से ही मानव जगत के लिए ‘संविधान’ की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि अथर्ववेद के अनुसार हिंदू वह है जो अहिंसा आदि दुष्कर्मों से मुक्त और शुद्ध हो। उन्होंने आह्वान किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हिंदू जाति को संगठित होकर आगे आने की आवश्यकता है।
“संघे शक्ति कलियुगे”: संगठन ही कलयुग का मंत्र
“कलयुग में संगठन में ही शक्ति निहित है,” इस सूत्र को दोहराते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि हर हिंदू परिवार में पांच पांडवों की तरह रक्षक होने चाहिए। उन्होंने भगवान राम और कृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने शक्ति से दुष्टों का दलन किया और प्रेम व ज्ञान से समाज को तृप्त किया। उन्होंने हिंदुओं को सचेत करते हुए कहा कि दया और करुणा किसके प्रति होनी चाहिए, इस पर आत्ममंथन आवश्यक है।
समिति के सदस्य और गणमान्य जन रहे उपस्थित
कार्यक्रम में अम्बेडकर बस्ती हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष और पूर्व पार्षद श्याम सुंदर चांडक, महासचिव नारायण बिहाणी, भाजपा मंडल अध्यक्ष दिनेश चौहान, विप्र महासभा के योगेंद्र कुमार दाधीच, शिव सोनी, अनिल पांडे और ताराचंद गहलोत सहित अनेक संत-महात्मा और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। समिति ने संकल्प लिया कि इस सम्मेलन के माध्यम से बस्ती के प्रत्येक घर तक सांस्कृतिक चेतना का संदेश पहुंचाया जाएगा।








