महाराणा प्रताप के जीवन मूल्य विद्यार्थियों के लिए अनुकरणीय – डॉ. गौरव बिस्सा


बीकानेर, 19 जनवरी। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के इतिहास विभाग में आज अदम्य साहस और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप का बलिदान दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रताप के जीवन को केवल युद्ध कौशल तक सीमित न मानकर उसे ‘जीवन प्रबंधन’ (Life Management) का सर्वोत्तम अध्याय बताया।


प्रताप का जीवन प्रबंधन और इतिहास बोध: डॉ. गौरव बिस्सा


मुख्य वक्ता और प्रबंधन गुरु डॉ. गौरव बिस्सा (इंजीनियरिंग कॉलेज) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप के मूल्य आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने बताया कि प्रताप ने सीमित संसाधनों में भी मुगलों जैसी विशाल सत्ता से लोहा लिया, जो उनके उत्कृष्ट ‘संसाधन प्रबंधन’ को दर्शाता है। डॉ. बिस्सा ने कहा, “महिलाओं के प्रति सम्मान, सामान्य वर्ग (भील और आदिवासियों) के साथ समन्वय और मूल्यों के साथ सम्मानजनक शांति ही प्रताप का वास्तविक दर्शन है।” उन्होंने युवाओं में इतिहासबोध की कमी पर चिंता जताते हुए शूरवीरों की जीवनियां पढ़ने का आह्वान किया।
स्वराज्य का सिद्धांत और सांस्कृतिक चेतना: डॉ. मेघना शर्मा
विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि प्रताप ने उस समय स्वतंत्रता के सिद्धांत को जीवित रखा जब अधिकांश क्षेत्रीय शक्तियां सत्ता और सुख के लिए मुगलों के अधीन हो गई थीं। उन्होंने कहा कि प्रताप का जीवन सिखाता है कि अपमान के सुख से कहीं अधिक श्रेष्ठ कष्टों भरा स्वाभिमान है। इसी त्याग और निष्ठा के कारण वे आज भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग हैं।
गीत और पुष्पांजलि से दी श्रद्धांजलि
समारोह में विधि विभाग के छात्र बैरिशाल सिंह नीमराना ने महाराणा प्रताप के शौर्य पर आधारित एक ओजस्वी गीत प्रस्तुत किया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के भाव से भर गया। इससे पूर्व अतिथियों और विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को नमन किया।
उपस्थिति एवं धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम का कुशल संचालन रिंकू जोशी ने किया, जबकि डॉ. गोपाल व्यास ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन में डॉ. रीतेश व्यास, डॉ. खुशाल पुरोहित, भगवान सुथार, जसप्रीत सिंह, किरण, रामोवतार उपाध्याय, तेजपाल भारती, बजरंग कलवानी और उमेश पुरोहित सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।






