सामूहिक सावा अनुदान राशि का वितरण


- 92 कन्याओं को मिले चेक, आगामी सावे के लिए जुटी समाज की हस्तियाँ
बीकानेर, 19 जनवरी । पुष्करणा ब्राह्मण समाज की अनूठी सामूहिक विवाह परंपरा को संबल देने के उद्देश्य से आज ‘पुष्करणा सावा समिति’ (पुष्करणा प्रन्यास द्वारा संचालित) के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोकुल सर्किल स्थित सूरदासानी बगीची में आयोजित इस समारोह में विगत सावे की पात्र कन्याओं को सरकारी अनुदान राशि का वितरण किया गया और आगामी 10 फरवरी 2026 को होने वाले ‘ओलंपिक सावे’ की तैयारियों पर व्यापक चर्चा की गई।


92 कन्याओं को मिली सरकारी सहायता


संस्था के संयोजक सुरेंद्र कुमार व्यास और सचिव अनिल कुमार पुरोहित ने बताया कि पिछले पुष्करणा सावे के दौरान सरकार द्वारा स्वीकृत सामूहिक विवाह अनुदान राशि के तहत आज 92 कन्याओं को 4,000-4,000 रुपये के चेक वितरित किए गए। कार्यक्रम का आगाज़ इष्टदेवी उष्ट्रवाहिनी माता एवं भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
विधायक जेठानन्द व्यास की बड़ी घोषणा- उपहार स्वरूप मिलेंगे 11,000 रुपये
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास ने समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी 10 फरवरी 2026 को होने वाले सावे में विवाह सूत्र में बंधने वाली प्रत्येक कन्या को उनके परिवार के ट्रस्ट की ओर से 11,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। विधायक की इस घोषणा का समाज के प्रबुद्धजनों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।
रीति-रिवाजों में सरलता और सादगी पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सत्य प्रकाश आचार्य सहित राजेश चूरा, कमल रंगा, ओंकार हर्ष और कन्हैया लाल जोशी जैसे वक्ताओं ने समाज में बढ़ती तड़क-भड़क पर चिंता व्यक्त की। सभी ने एक स्वर में सुझाव दिया कि सावे की मूल भावना ‘सादगी’ को बनाए रखने के लिए रीति-रिवाजों और अनावश्यक खर्चों को कम किया जाना चाहिए, ताकि सामूहिक विवाह की सार्थकता बनी रहे।
प्रमुख जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर वीरेंद्र किराडू, शिवजी महाराज व्यास, रमेश बोहरा, प्रेम शंकर, रास बिहारी जोशी, श्रीमती राज कुमारी, आरती आचार्य, शशि व्यास, नवरत्न व्यास, सुमनेश रंगा और भरत पुरोहित सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए सावा समिति के प्रयासों की सराहना की।






