बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने मनाया ‘प्रोटेस्ट डे’, 194वीं बार सौंपा ज्ञापन

बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने मनाया 'प्रोटेस्ट डे', 194वीं बार सौंपा ज्ञापन
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 17 फरवरी। बीकानेर संभाग मुख्यालय पर राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ (बेंच) स्थापित करने की दशकों पुरानी मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बार एसोसिएशन बीकानेर के तत्वावधान में मंगलवार को अधिवक्ताओं ने ‘प्रोटेस्ट डे’ मनाया। यह विरोध प्रदर्शन 17 अगस्त 2009 को आम सभा में लिए गए उस ऐतिहासिक निर्णय की निरंतरता में आयोजित किया गया, जिसके तहत अधिवक्ता हर माह इस मांग को लेकर आवाज उठाते हैं।

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विरोध के स्वरूप आज बीकानेर के अधिवक्ताओं ने न्यायालयों में पैरवी स्थगित रखी और न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

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राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के नाम 194वां ज्ञापन
आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज बार एसोसिएशन द्वारा 194वां ज्ञापन प्रेषित किया गया।

कलेक्टर के माध्यम से: अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

न्यायालय के माध्यम से: जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमान अश्विनी विज के जरिए माननीय मुख्य न्यायाधिपति, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर को ज्ञापन भेजकर बीकानेर की भौगोलिक स्थिति और जनता की सुविधा का हवाला देते हुए जल्द से जल्द बेंच स्थापना की मांग की गई।

अधिवक्ताओं की भारी उपस्थिति
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी सहित वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान उपाध्यक्ष लेखराम धतरवाल, सचिव हेमन्त सिंह चौहान, धर्मेंद्र वर्मा, सुरेन्द्र पाल शर्मा, रघुवीर सिंह, और दामोदर शर्मा प्रमुखता से उपस्थित रहे।

इसके अलावा सोमदत पुरोहित, मनीराम बिश्नोई, मुखराम कुकणा, चतुर्भुज सारस्वत, पवन स्वामी, गणेश टाक, सुखदेव व्यास, विजय दीक्षित, प्रदीप शर्मा, संजय गौतम, ताराचन्द उपाध्याय, प्रशान्त तंवर और सकिना बानो सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण इस मुहिम का हिस्सा बने। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक बीकानेर को उसका हक (हाईकोर्ट बेंच) नहीं मिल जाता, यह शांतिपूर्ण संघर्ष और ‘प्रोटेस्ट डे’ का सिलसिला जारी रहेगा।

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