डिजिटल बाल मेला 2026′ में जिला स्तर पर प्रतिभा दिखाएं, जीतें ₹50,000 और जयपुर की सैर
डिजिटल बाल मेला 2026' में जिला स्तर पर प्रतिभा दिखाएं, जीतें ₹50,000 और जयपुर की सैर


- चूरू के बच्चों के लिए सुनहरा मौका
चूरू/जयपुर, 21 फरवरी। शेखावाटी के प्रवेश द्वार चूरू जिले के प्रतिभावान बच्चों के लिए अपनी माटी की खुशबू और इतिहास को दुनिया के सामने लाने का एक अनूठा अवसर आया है। ‘डिजिटल बाल मेला 2026’ के तहत शुरू हुए नए अभियान में बच्चे अपने जिले की अनजानी कहानियों, गुमनाम नायकों और सांस्कृतिक धरोहर को पेश कर न केवल नकद इनाम जीत सकते हैं, बल्कि जयपुर में होने वाले ‘जयपुर बाल महोत्सव’ का हिस्सा भी बन सकते हैं।


राजस्थान स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला यह महोत्सव 1 से 3 अप्रैल तक सांगानेर स्थित पिंजरा पोल गौशाला में आयोजित किया जाएगा, जिसमें राजस्थान के सभी 41 जिलों की झलक देखने को मिलेगी।


वीडियो बनाकर बताएं: क्यों खास है अपना चूरू?
डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ना है। चूरू के बच्चों को एक छोटा वीडियो बनाकर यह बताना है कि उनके जिले में ऐसी कौन सी बात है जो अभी तक अनजानी है। यह कोई लोक परंपरा, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प या कोई ऐसा ‘गुमनाम हीरो’ हो सकता है जिसने समाज के लिए बड़ा काम किया हो।
कैसे करें पंजीकरण: इच्छुक बच्चे डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट digitalbaalmela.com या व्हाट्सएप नंबर 8005915026 पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश: पोस्टर विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री ने भी बच्चों से अपील की कि वे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने जिले की अनूठी विशेषताओं को साझा करें।
इनामों की बौछार: ₹50,000 का मुख्य पुरस्कार
फ्यूचर सोसाइटी के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने बताया कि इस महोत्सव में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिले को ₹50,000 का नकद इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा:
जयपुर भ्रमण: प्रत्येक जिले से विजेता चुने गए 4 बच्चों को 3 दिनों तक जयपुर के पर्यटन स्थलों की मुफ्त सैर कराई जाएगी।
सांस्कृतिक झांकी: जयपुर बाल महोत्सव में हर जिले की अलग झांकी सजाई जाएगी, जहां बच्चे अपने जिले की लोक संस्कृति और नवाचारों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करेंगे।
स्कूलों और अभिभावकों से अपील
अभियान के तहत जिला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों और अभिभावकों से विशेष अपील की गई है कि वे बच्चों को उनके स्थानीय इतिहास और परंपराओं के बारे में जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित करें। यह आयोजन बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और उन्हें राजस्थान की समृद्ध परंपराओं को समझने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा।
