सरकार के आदेश कागजी, जैसलमेर में फिर चली खेजड़ी पर कुल्हाड़ी
सरकार के आदेश कागजी, जैसलमेर में फिर चली खेजड़ी पर कुल्हाड़ी


- बीकानेर में 219वें दिन भी जारी रहा पर्यावरण प्रेमियों का धरना
बीकानेर, 21 फरवरी । राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने की जंग अब सरकार और पर्यावरण प्रेमियों के बीच आर-पार की लड़ाई में तब्दील होती दिख रही है। बीकानेर कलेक्ट्रेट के सामने पर्यावरण संघर्ष समिति का धरना आज 219वें दिन में प्रवेश कर गया, वहीं नोखा दईया (खेजड़ला रोही) में चल रहे धरने को 574 दिन पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमियों ने जैसलमेर में हाल ही में हुई खेजड़ी कटाई की घटनाओं को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया।


“वादाखिलाफी कर रही है सरकार” – सियाग
धरने को संबोधित करते हुए प्रमुख पर्यावरण प्रेमी गंगाबिशन सियाग ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा लिखित आदेश की अवहेलना खुलम खुला हो रही है। सरकार ने लिखित में आश्वासन दिया था कि भविष्य में एक भी खेजड़ी नहीं काटी जाएगी, जिसके बाद महापड़ाव स्थगित किया गया था। इसके बावजूद जैसलमेर इलाके में खेजड़ियों का कटना सरकार की वादाखिलाफी और प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।


दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति: यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य वृक्ष के संरक्षण के लिए जनता को वर्षों तक धरने पर बैठना पड़ रहा है और सरकार के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं।
गंभीरता का अभाव: सियाग ने आरोप लगाया कि सरकार न तो पर्यावरण के प्रति गंभीर है और न ही अपनी साख के प्रति।
25 जिलों के पर्यावरण रक्षक एकजुट
बीकानेर में चल रहे इस धरने को प्रदेश भर के विभिन्न समुदायों का समर्थन मिल रहा है। आज धरने पर हीरां बिशनोई, रामगोपाल बिशनोई, शिवदान मेघवाल, ताहिर खान और हनुमान काकड़ सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। धरने में शामिल लोगों ने एक स्वर में कहा कि जब तक खेजड़ी की अवैध कटाई पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जैसलमेर में हुई हालिया घटना ने एक बार फिर सौर ऊर्जा परियोजनाओं और विकास के नाम पर हो रहे ‘हरित नरसंहार’ की ओर ध्यान खींचा है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थगित किया गया महापड़ाव दोबारा शुरू किया जाएगा।
