राजस्थानी भाषा की मान्यता 10 करोड़ लोगों का हक, केंद्र अब और न ले धैर्य की परीक्षा: देवीसिंह भाटी
राजस्थानी भाषा की मान्यता 10 करोड़ लोगों का हक, केंद्र अब और न ले धैर्य की परीक्षा: देवीसिंह भाटी


बीकानेर, 21 फरवरी। बीकानेर कलेक्ट्रेट परिसर पिछले तीन दशकों से एक ऐतिहासिक संघर्ष का गवाह बना हुआ है। शनिवार को राजस्थानी मोट्यार परिषद द्वारा आयोजित धरने में प्रदेश के कद्दावर नेताओं और साहित्यकारों ने एक सुर में केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि राजस्थानी भाषा की मान्यता अब केवल मांग नहीं, बल्कि राजस्थानियों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व सिंचाई मंत्री देवीसिंह भाटी और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने एक ही मंच से भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए हुंकार भरी।


“अस्सी सालों का धैर्य अब जवाब दे रहा है” – देवीसिंह भाटी
पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी ने धरने को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। केंद्र सरकार 10 करोड़ लोगों की जनभावनाओं का अनादर कर रही है।


अस्तित्व का संरक्षण: यदि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ना है, तो भाषा को मान्यता मिलना अनिवार्य है।
चेतावनी: राजस्थान शूरवीरों की धरा है जो 80 सालों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। सरकारों को इनके धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
पक्ष-विपक्ष एकजुट: डॉ. कल्ला ने याद दिलाया 2003 का प्रस्ताव
पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा कि राजस्थानी एक अत्यंत समृद्ध और प्राचीन भाषा है। उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब राजस्थान विधानसभा ने 2003 में ही सर्वसम्मति से इसे मान्यता देने का प्रस्ताव पास कर दिया था, तो केंद्र अब तक इस पर कुंडली मारकर क्यों बैठा है? उन्होंने आह्वान किया कि भाषाई मुद्दे पर राजनीति छोड़कर पक्ष और विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना होगा।
मान्यता से खुलेंगे रोजगार के द्वार: डॉ. शिवदान सिंह जोलावास
उदयपुर से पहुंचे राजस्थानी मोट्यार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिवदान सिंह जोलावास ने भाषा की मान्यता को सीधे रोजगार से जोड़ा। उन्होंने दावा किया:
स्थानीय युवाओं को लाभ: मान्यता मिलने के बाद हर सरकारी विभाग में राजस्थानी भाषा अनिवार्य होगी, जिससे बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का प्रवेश रुकेगा और राजस्थान के युवाओं को लाखों नौकरियां मिलेंगी।
वैज्ञानिक मापदंड: प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर प्रजापत ने स्पष्ट किया कि राजस्थानी भाषा वैज्ञानिकों द्वारा तय किए गए सभी भाषाई मापदंडों पर खरी उतरती है।
युवाओं और साहित्यकारों का आक्रोश
साहित्यकार राजेन्द्र जोशी और केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कृत शंकर सिंह राजपुरोहित ने कविताओं के माध्यम से सरकार पर प्रहार किया। छात्र नेता कृष्ण कुमार गोदारा और एनएसयूआई जिलाध्यक्ष हरिराम गोदारा ने दोटूक कहा कि यदि सरकार ने युवाओं के धैर्य की परीक्षा लेना बंद नहीं किया, तो आगामी चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
धरने में नागौर, बाड़मेर, सीकर, गंगानगर और जयपुर सहित प्रदेश के कोने-कोने से भाषा समर्थक पहुंचे। कार्यक्रम का संचालन मदन दासोड़ी ने किया और आभार दिलीप सेन व बजरंग बिश्नोई ने व्यक्त किया।
