बीकानेर में मासूम की हत्या पर आक्रोश, तीसरे दिन भी पोस्टमॉर्टम पर अड़े परिजन 10 टीमें जुटीं जांच में
बीकानेर में मासूम की हत्या पर आक्रोश, तीसरे दिन भी पोस्टमॉर्टम पर अड़े परिजन 10 टीमें जुटीं जांच में


बीकानेर, 23 फरवरी। बीकानेर के श्रीकोलायत क्षेत्र में आठवीं बोर्ड की परीक्षा देने घर से निकली 13 वर्षीय मासूम छात्रा की निर्मम हत्या के मामले ने अब बड़ा तूल पकड़ लिया है। घटना के तीसरे दिन भी आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिलने से परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। आक्रोशित ग्रामीण और परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे।


पुलिस की घेराबंदी: 10 टीमें और साइबर सेल सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। एसपी कावेंद्र सिंह सागर ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए 10 विशेष टीमें गठित की गई हैं।


तकनीकी साक्ष्य: पुलिस की साइबर सेल मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। साथ ही, घटनास्थल के आसपास और रास्ते में लगे तमाम सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है।
पोस्टमॉर्टम का इंतजार: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों और एफआईआर में दर्ज दुष्कर्म की आशंका की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
सियासी उबाल: पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल
इस जघन्य हत्याकांड ने प्रदेश की सियासत को भी गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना की निंदा करते हुए इसे ‘राज्य को शर्मसार करने वाली’ बताया। उन्होंने सरकार से मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
अर्जुन राम मेघवाल का हस्तक्षेप: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एसपी से फोन पर अपडेट लिया और जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।
नेताओं का जमावड़ा: अस्पताल परिसर में विधायक अंशुमान सिंह भाटी, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग और महेंद्र गहलोत सहित कई नेता पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
असुरक्षित होती बेटियां: ग्रामीणों में भारी रोष
ग्रामीणों का कहना है कि परीक्षा देने गई बेटी का इस तरह शव मिलना व्यवस्थाओं पर बड़ा सवालिया निशान है। धरने पर बैठे लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन और परिजनों के बीच वार्ता का दौर जारी है, लेकिन शव अभी भी अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है।
