खड़ग शक्ति 2026- महाजन रेंज में गूंजती हुंकार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पश्चिमी सीमा पर सबसे बड़ा सैन्य शक्ति प्रदर्शन
खड़ग शक्ति 2026- महाजन रेंज में गूंजती हुंकार


बीकानेर/जैसलमेर, 23 फरवरी। राजस्थान की तपती रेत और अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता का सबसे आधुनिक प्रदर्शन कर रही है। एशिया की सबसे बड़ी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में ‘खड़ग शक्ति 2026’ युद्धाभ्यास अपने चरम पर है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पश्चिमी कमान का सबसे सघन और तकनीकी रूप से उन्नत युद्धाभ्यास है, जो दुश्मन के लिए एक सीधा सामरिक संदेश है।


टेक्नोलॉजी ड्रिवन वॉरफेयर: अब टैंकों के साथ गरजेंगे एआई और ड्रोन
भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध के तरीकों से आगे बढ़कर ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवन’ ऑपरेशंस की ओर कदम बढ़ा चुकी है। इस अभ्यास की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं .


स्वार्म ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन: झुंड में हमला करने वाले ड्रोन और ऐसे हथियार जो हवा में तैरते हुए दुश्मन को खोजकर खुद को ब्लास्ट कर देते हैं, उनका पहली बार इतने बड़े पैमाने पर परीक्षण हो रहा है।
लॉजिस्टिक ड्रोन्स: कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में गोला-बारूद और रसद पहुंचाने के लिए भारी वजन उठाने वाले ड्रोन्स का उपयोग किया जा रहा है।
सटीक मारक क्षमता (AI): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए लक्ष्य की सटीक पहचान और न्यूनतम नुकसान के साथ दुश्मन को खत्म करने की रणनीति को परखा जा रहा है।
नाइट कॉम्बैट: रात के अंधेरे में ‘भीष्म’ का तांडव
‘खड़ग शक्ति’ का सबसे रोमांचक हिस्सा रात के अंधेरे में किया जाने वाला अभ्यास है। आज सोमवार रात को सेना की बख्तरबंद और मशीनीकृत इकाइयां रात के सन्नाटे को अपनी गूँज से भर देंगी।
टी-90 भीष्म टैंक: थर्मल इमेजर और उन्नत नाइट विजन उपकरणों से लैस ये टैंक रात के अंधेरे में भी कई किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को ध्वस्त करने का अभ्यास करेंगे।
अंधेरे में समन्वय: यह ड्रिल साबित करती है कि भारतीय सेना अब 24×7 किसी भी स्थिति में युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
थल और नभ का अद्भुत तालमेल: हेलीबोर्न ऑपरेशंस
अभ्यास के दौरान वायु सेना और थल सेना के बीच जबरदस्त ‘इंटर-ऑपरेबिलिटी’ देखी जा रही है। हमलावर हेलीकॉप्टर दुश्मन के पीछे के इलाकों में सैनिकों को ‘हेलीबोर्न ऑपरेशंस’ के जरिए उतार रहे हैं, ताकि दुश्मन को संभलने का मौका न मिले। तोपखाना (Artillery) की कवरिंग फायर के बीच बख्तरबंद रेजिमेंट का आगे बढ़ना किसी फिल्मी दृश्य जैसा रोमांच पैदा कर रहा है।
रणनीतिक संदेश और उच्च नेतृत्व की निगरानी
इस युद्धाभ्यास पर थल सेनाध्यक्ष सहित देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की पैनी नजर है। सीमा पार (पाकिस्तान बॉर्डर) से कुछ ही दूरी पर हो रहा यह अभ्यास भारत की तैयारियों और ‘वॉरफेयर डॉक्ट्रिन’ (युद्ध सिद्धांत) में आए क्रांतिकारी बदलाव को दर्शाता है। यह युद्धाभ्यास स्पष्ट करता है कि भारत अब कम समय में सटीक और घातक प्रहार करने की क्षमता रखता है।
