भक्ति और फाग का संगम ,शाकद्वीपीय समाज ने नागणेची माता से ली होली की अनुमति; गेर के साथ शहर में हुआ ‘होलका’ का आगाज
भक्ति और फाग का संगम ,शाकद्वीपीय समाज ने नागणेची माता से ली होली की अनुमति


बीकानेर, 23 फरवरी। बीकानेर की रियासतकालीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए सोमवार को शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज ने लोक संस्कृति और आस्था के अनूठे मेल के साथ होली उत्सव की शुरुआत की। समाज के लोगों ने प्राचीन नागणेची माता मंदिर पहुंचकर माता के चरणों में इत्र और गुलाल अर्पित किया और पारंपरिक भजनों के माध्यम से ‘होलका’ (होली उत्सव) शुरू करने की विधिवत अनुमति मांगी। इसके बाद देर रात शहर के मुख्य मार्गों से भव्य गेर निकालकर फागुन की मस्ती का शंखनाद किया गया।


भजनों से रीझीं मां भवानी: ‘पन्नो रे मारी जोड़ रो’ की रही धूम
भाई बन्धु ट्रस्ट के महामंत्री नितिन वत्सस ने बताया कि शाम ढलते ही नागणेची मंदिर प्रांगण शाकद्वीपीय समाज के भजनों से गूंज उठा। समाज के गायकों ने ‘हंस चढ़ी माँ आयी भवानी रे’, ‘पन्नो रे मारी जोड़ रो रे बीकोण रो बासी रे’, और ‘जयपुर में बाजार में पड़ियो प्रेमजी बोर’ जैसे पारंपरिक फाग और भक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।


इत्र-गुलाल अर्पण: रात्रि 8 बजे माता को इत्र और गुलाल चढ़ाकर बीकानेर में होली उत्सव निर्बाध संपन्न होने की अरदास की गई। पुजारी राजेश सेवग और सुरेश सेवग ने भक्तों को गुलाल का टीका लगाकर उत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया।
देर रात निकली गेर: ‘ओ लाल केशा’ की तान पर झूमा बीकानेर
माता से अनुमति प्राप्त करने के बाद देर रात गोगागेट से शाकद्वीपीय समाज की पारंपरिक गेर रवाना हुई।
प्रमुख मार्ग: यह गेर बागड़ियों के मोहल्ले, रामदेव मंदिर, चाय पट्टी, बड़ा बाजार और बैदों के चौक से होती हुई मरुनायक चौक पहुंची और अंत में सेवगों के चौक में संपन्न हुई।
लोक गायन: गेर के दौरान ‘ओ लाल केशा’ और ‘पापड़ली’ जैसे पारंपरिक गीतों का गायन हुआ, जिसने पूरे परकोटे को फागणमय कर दिया। नगाड़े पर रामजी सेवग और चिराग सेवग ने संगत की।
सामूहिक प्रसादी और सामाजिक एकजुटता
उत्सव के इस अवसर पर शाकद्वीपीय समाज द्वारा विभिन्न स्थानों पर सामूहिक प्रसादी का आयोजन किया गया। हंसावतों की तलाई, सूर्य भवन, जनेश्वर भवन, शिव शक्ति भवन और श्यामौजी वंशज प्रन्यास भवन में समाज के लोगों ने एक साथ प्रसादी ग्रहण कर आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इस दौरान सुशील सेवग (लालजी), विष्णु सेवग, सीताराम सेवग सहित मरुनायक मंडल के सदस्य गेवर जी भादाणी और अजय कुमार देराश्री जैसे गणमान्य जन उपस्थित रहे।
