बीकानेर के 20 बुजुर्ग निशुल्क घुटना प्रत्यारोपण के लिए अहमदाबाद रवाना


- सीएम मूंधड़ा फाउण्डेशन की बड़ी पहल
बीकानेर, 4 दिसम्बर। मानवता की सेवा में समर्पित सीएम मूंधड़ा फाउण्डेशन, मुंबई द्वारा जनहित में एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। फाउण्डेशन की ओर से इस वर्ष के दूसरे सेवा प्रकल्प के तहत बीकानेर जिले के 20 जरूरतमंद वृद्धजनों को निशुल्क घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) हेतु गुजरात के अहमदाबाद शहर भेजा गया है। रविवार को सीओ सिटी अनुज ढाल ने हरी झंडी दिखाकर इन मरीजों को रवाना किया।


रवानगी के अवसर पर सीओ सिटी अनुज ढाल ने सभी वृद्धजनों से आत्मीय मुलाकात कर उनके सफल ऑपरेशन और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने फाउण्डेशन और इस प्रकल्प के प्रेरक द्वारका प्रसाद पचीसिया के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के पुनीत कार्य समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को नई गति प्रदान करते हैं।


नापासर शिविर से हुआ था चयन,रोबोटिक सर्जरी से होगा इलाज
बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष और कार्यक्रम के प्रेरक द्वारका प्रसाद पचीसिया ने बताया कि पूर्व में नापासर में आयोजित एक विशेष शिविर के दौरान कुल 278 मरीजों की जांच की गई थी। विशेषज्ञों द्वारा गहन परीक्षण के बाद 60 वृद्धजनों को घुटना प्रत्यारोपण के लिए चयनित किया गया था। इनमें से प्रथम चरण में 26 मरीजों का सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में अब शेष 20 मरीजों को अहमदाबाद भेजा गया है। इन मरीजों का उपचार अहमदाबाद के प्रसिद्ध केडी अस्पताल में वरिष्ठ रोबोटिक सर्जन डॉ. अमीर सिंघवी द्वारा अत्याधुनिक तकनीक से किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि फाउण्डेशन अब तक कुल 86 लोगों का निशुल्क घुटना प्रत्यारोपण करवा चुका है।
मरीजों का समस्त व्यय वहन करेगी फाउण्डेशन
सेवा भावना की मिसाल पेश करते हुए फाउण्डेशन ने व्यवस्था की है कि मरीजों के साथ उनके एक-एक सहयोगी (अटेंडेंट) को भी भेजा गया है। बीकानेर से अहमदाबाद आने-जाने, वहां रहने, खान-पान और ऑपरेशन व दवाइयों का समस्त खर्च सीएम मूंधड़ा फाउण्डेशन द्वारा वहन किया जाएगा। इस अवसर पर पीयूष सिंघी, सन्तोष आसोपा, पवन पचीसिया, विपिन मुसरफ, फिजियोथेरेपिस्ट भवानी शंकर, जयदीप बिस्सा और कमल रंगा सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। फाउण्डेशन के इस कदम से उन बुजुर्गों के जीवन में नई उम्मीद जगी है जो आर्थिक तंगी के कारण इस महंगे ऑपरेशन से वंचित थे।








