चंग की थाप पर झूम उठा चूरू: सफेद घंटाघर पर फागोत्सव ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
चंग की थाप पर झूम उठा चूरू


चूरू, 22 फरवरी। मरुधरा की माटी में जब फागुन की बयार और चंग की थाप घुलती है, तो फिजाओं में लोक संस्कृति की महक तैरने लगती है। रविवार शाम चूरू के ऐतिहासिक सफेद घंटाघर पर ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां साकार संस्थान की ओर से आयोजित ‘फागोत्सव–2026’ ने शहरवासियों को पारंपरिक उमंग से सराबोर कर दिया। रतनलाल पारख की स्मृति में कोलकाता के बसंत कुमार व संजय कुमार पारख के सौजन्य से हुए इस उत्सव ने चूरू की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा दी।
राजलदेसर की चंग पार्टी ने बांधा समां
उत्सव का मुख्य आकर्षण राजलदेसर से आई श्याम म्यूजिकल ग्रुप चंग पार्टी रही। कलाकारों ने चंग की थाप पर जब पारंपरिक फाग गीतों की रसधार बहाई, तो वहां मौजूद हर शख्स थिरकने को मजबूर हो गया।


सांस्कृतिक वैभव: ‘फाग’ के रंगों में रचे-बसे गीतों और लोकधुनों ने मरुभूमि की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया।


जनभागीदारी: कार्यक्रम में बुजुर्गों के अनुभव और युवाओं के जोश का संगम दिखा, जिसने पूरे घंटाघर क्षेत्र को एक पारंपरिक मेले में तब्दील कर दिया।
प्रतिभाओं का सम्मान: पत्रकार और लोक कलाकार नवाजे गए
कार्यक्रम के दौरान समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को स्मृति पुरस्कारों से सम्मानित किया गया:
पत्रकार पीयूष शर्मा स्मृति पुरस्कार: पत्रकार राहुल शर्मा को उनकी पत्रकारिता के लिए प्रदान किया गया।
रमाकांत ओझा स्मृति पुरस्कार: लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए लोक कलाकार पंकज ओझा को सम्मानित किया गया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सभापति गोविंद महनसरिया ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सभापति विजय शर्मा मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रमोद बाजोरिया, एपीआरओ मनीष कुमार और महेंद्र चौबे सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। संचालन उमेष दाधीच ने अपने चिर-परिचित अंदाज में किया। साकार संस्थान के इस सफल आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी लोक संस्कृति और जड़ों को संजोए रखना न केवल हमारी पहचान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत भी है।
