बीकानेर में शीतलहर का अलर्ट, आंगनबाड़ी केंद्रों में 10 जनवरी तक छुट्टी, मंदिरों में भगवान को ओढ़ाए गर्म वस्त्र


बीकानेर, 4 दिसम्बर । मरुधरा में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। साल की शुरुआत के साथ ही बीकानेर जिले में गलन और तीखी सर्दी का अहसास बढ़ गया है। मौसम की इस मार को देखते हुए जिला प्रशासन ने छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए 2 से 10 जनवरी तक अवकाश घोषित कर दिया है।


शुक्रवार सुबह से ही पूरा बीकानेर घने कोहरे की चादर में लिपटा रहा। दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण हाईवे पर वाहन चालक हेडलाइट जलाकर रेंगते नजर आए। हाड़ कंपाने वाली इस सर्दी से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं, वहीं बाजारों में गर्म कपड़ों, रेवड़ी और गजक की मांग में भारी उछाल आया है।


आंगनबाड़ी कर्मियों की छुट्टी नहीं, घर पहुंचेगा पोषाहार
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अवकाश रहेगा। केंद्र पर कार्यरत कार्यकर्ता और सहायिकाएं निर्धारित समय पर उपस्थित रहेंगी ताकि टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित न हों। बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए, केंद्रों पर मिलने वाला गरम पोषाहार अब ‘टेक होम राशन’ (THR) के रूप में सीधे बच्चों के घर पहुंचाया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर भी ‘ठंड’ का असर: बजरंग धोरा में विशेष शृंगार
सर्दी के बढ़ते प्रकोप का असर बीकानेर की आस्था पर भी दिखाई दे रहा है। प्रसिद्ध बजरंग धोरा हनुमान मंदिर में हनुमान जी का विशेष शीतकालीन शृंगार किया गया। मंदिर के पुजारी आशीष दाधीच ने बताया कि बाबा को ठंड से बचाव के लिए गर्म मखमल के वस्त्र धारण करवाए गए हैं। इसके साथ ही ऋतु परिवर्तन के अनुसार बजरंगबली को रेवड़ी, मूंगफली, गजक और घेवर का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने इस दौरान सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर मंगल कामना की।
अगले दो दिन ‘कोल्ड डे’ की चेतावनी
मौसम विभाग ने बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक तीव्र शीतलहर (Severe Cold Wave) की संभावना जताई है। हालांकि कोहरे की तीव्रता में कुछ कमी आने की उम्मीद है, लेकिन बर्फीली हवाओं के कारण गलन बरकरार रहेगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पाला पड़ने की तत्काल संभावना न होने के बावजूद किसानों ने रबी की फसलों को बचाने के लिए खेतों की मेड़ों पर धुआं करने और सिंचाई के इंतजाम शुरू कर दिए हैं।








