मर्यादा और एकजुटता ही तेरापंथ धर्मसंघ की शक्ति; आचार्य भिक्षु ने भगवान महावीर की वाणी को दिया शुद्ध स्वरूप — मुनि कमल कुमार


गंगाशहर, 17 जनवरी । आचार्य श्री महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती, उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने शनिवार, 17 जनवरी 2026 को तेरापंथ भवन, गंगाशहर में आयोजित दैनिक प्रवचन सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुनि श्री ने तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें ‘मर्यादा पुरुष’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु ने भगवान महावीर के सिद्धांतों का गहन अध्ययन कर उनका शुद्ध और सरल स्वरूप जनता के समक्ष रखा।


मुनि श्री ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में कहा कि हर महापुरुष के नए विचारों का प्रारंभ में विरोध होता है क्योंकि जनता उनसे अपरिचित होती है, लेकिन जैसे-जैसे दर्शन समझ में आता है, वही समाज उनका अनुयायी बन जाता है। आचार्य भिक्षु का मूल लक्ष्य स्वयं का आत्मोद्धार था, लेकिन उन्होंने जनोद्धार को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना। उन्होंने साधु-साध्वियों के लिए कठोर मर्यादाओं का निर्माण किया, जो आज भी इस धर्मसंघ की एकजुटता का आधार हैं।


मर्यादा पत्र: एकजुटता का मूल मंत्र
मुनि श्री ने तेरापंथ की अनुशासित व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आचार्य भिक्षु ने साधु-साध्वियों के लिए हाजिरी (मर्यादा पत्र) के वाचन की परंपरा शुरू की थी। कालांतर में चतुर्थ आचार्य श्री जीतमल जी (जयाचार्य) ने इसे सप्ताह में दो बार किया और नवम आचार्य श्री तुलसी ने महीने में दो बार हाजिरी के वाचन को अनिवार्य बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेरापंथ की चिरजीविता का राज इसकी ‘एकता’ में है—एक आचार्य, एक आचार, एक विचार और एक समाचारी। आचार्य भिक्षु ने व्यक्तिगत शिष्य प्रथा को समाप्त कर संघ को एक सूत्र में पिरोया, जो आज अन्य धर्मसंघों के लिए भी अनुकरणीय है।
तपस्वी का अभिनंदन और डॉ. कोचर का सम्मान
प्रवचन सभा के दौरान आध्यात्मिक तपस्या का विशेष उल्लास देखने को मिला। तपस्वी भाई कुलदीप छाजेड़ की 23 दिवसीय कठिन तपस्या की अनुमोदना की गई। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष नवरतन बोथरा, मंत्री जतनलाल संचेती, उपाध्यक्ष पवन छाजेड़, शांतिलाल पुगलिया और देवेंद्र डागा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने तपस्वी का अभिनंदन किया।

इसी क्रम में, शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में साध्वी श्री विशद्प्रज्ञा जी के दर्शनार्थ पहुंचे प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अभिषेक कोचर का भी सम्मान किया गया। तेरापंथी सभा के पदाधिकारियों ने उन्हें साहित्य और धर्मसंघ की पताका भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर मुनि श्री के पावन पाथेय का लाभ उठाया।








