तनाव मुक्त रहने के लिए डीआरडीओ वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह परोडा ने दिए युवाओं को टिप्स
तनाव मुक्त रहने के लिए डीआरडीओ वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह परोडा ने दिए युवाओं को टिप्स


- ईसीबी में गूंजा ‘खुशहाल जीवन’ का मंत्र
बीकानेर, 20 फरवरी। इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर (ECB) के स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर (SAC) द्वारा आज “युवाओं के लिए तनाव मुक्त जीवन” विषय पर एक महत्वपूर्ण मेंटरिंग सत्र का आयोजन किया गया। वर्तमान समय की कड़ी प्रतिस्पर्धा और करियर के दबाव को देखते हुए आयोजित इस कार्यशाला में प्रख्यात वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक चिंतकों ने विद्यार्थियों को मानसिक शांति और संतुलन के गुर सिखाए।


तनाव बाहरी परिस्थितियों में नहीं, हमारी सोच में है: डॉ. परोडा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, डीआरडीओ (DRDO) के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजेन्द्र सिंह परोडा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तनाव अक्सर बाहरी परिस्थितियों से ज्यादा हमारी अपनी सोच और नजरिए से पैदा होता है। उन्होंने सफलता के तीन प्रमुख सूत्र दिए।


स्वीकार्यता: चीजों को उसी रूप में स्वीकार करना सीखें जैसी वे हैं, इससे मानसिक प्रतिरोध कम होता है।
समय प्रबंधन: स्पष्ट लक्ष्य और सही टाइम मैनेजमेंट मानसिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक है।
आत्मविश्वास: नियमित ध्यान और सकारात्मक चिंतन से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जो तनाव को दूर भगाता है।
तुलना और अपेक्षाएं हैं तनाव की जड़
तेज ज्ञान फाउंडेशन की प्रमुख वक्ता श्रीमती सुखपाल परोडा ने वर्तमान क्षण में जीने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों से तुलना करना और स्वयं से अत्यधिक अपेक्षाएं रखना ही तनाव का मुख्य कारण है। उन्होंने विद्यार्थियों को कृतज्ञता (Gratitude) का भाव विकसित करने और आत्मस्वीकृति के साथ जीवन को संतुलित बनाने की सलाह दी।
महाविद्यालय की महत्वपूर्ण पहल
महाविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अमीत सोनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज के दौर में विद्यार्थी पढ़ाई और भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण गहरे मानसिक दबाव में हैं, ऐसे में इस तरह के सत्र उनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।
सम्मान समारोह: डॉ. प्रीति नरुका और डॉ. चंचल कच्छावा ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया।
उपस्थिति: कार्यक्रम में डॉ. विकास शर्मा, डॉ. महेंद्र व्यास, डॉ. राखी पारीक सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ और 100 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। सत्र के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें अपनी समस्याओं को देखने का एक नया और सकारात्मक नजरिया दिया है।
