सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए खुले द्वार; HCS भर्ती फॉर्म में शामिल हुआ ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए खुले द्वार


चंडीगढ़, 24 फ़रवरी । हरियाणा में समावेशी शासन और सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े रुख और दिशा-निर्देशों के बाद, अब राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सेवा हरियाणा सिविल सेवा (HCS) सहित सभी सरकारी भर्तियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आवेदन के रास्ते आधिकारिक तौर पर खुल गए हैं। लंबे समय से रोजगार के समान अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए यह निर्णय एक नई उम्मीद लेकर आया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लिंग के आधार पर किसी भी नागरिक को सरकारी सेवा से वंचित रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।


HPSC ने पोर्टल में किया तकनीकी बदलाव
अदालती आदेशों की अनुपालन में हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने त्वरित कार्रवाई की है। आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म के ‘जेंडर’ (Ling) कॉलम में ‘पुरुष’ और ‘महिला’ के साथ-साथ अब ‘ट्रांसजेंडर’ का विकल्प भी जोड़ दिया है। इस महत्वपूर्ण अपडेट को लागू करने के लिए आयोग ने 23 फरवरी को अपनी वेबसाइट को एक घंटे के लिए अस्थायी रूप से बंद रखा था। तकनीकी सुधार के बाद, अब ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी बिना किसी कानूनी या तकनीकी बाधा के प्रशासनिक पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे।


सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह
यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है। समान अधिकार: अब इस समुदाय के युवा भी अपनी योग्यता के बल पर डीएसपी, एसडीएम और अन्य राजपत्रित पदों पर आसीन हो सकेंगे। भेदभाव का अंत: भर्ती प्रक्रियाओं में ‘थर्ड जेंडर’ की आधिकारिक प्रविष्टि से कार्यस्थलों पर उनके प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव आएगा।
सुप्रीम कोर्ट के ‘नालसा’ फैसले का पालन: यह आदेश 2014 के राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की भावना को पुष्ट करता है। हरियाणा सरकार और लोक सेवा आयोग के इस निर्णय का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और ट्रांसजेंडर अधिकार समूहों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से अन्य राज्यों पर भी अपने भर्ती नियमों में इसी तरह के प्रगतिशील बदलाव करने का दबाव बढ़ेगा।
