महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर विशेष व्याख्यान

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' पर विशेष व्याख्यान
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quicjZaps 15 sept 2025

IPSA के साथ अकादमिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

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बीकानेर, 12 नवंबर । महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU), बीकानेर में बुधवार को “परंपरा से आधुनिकता तक: भारतीय ज्ञान की यात्रा एवं शिक्षकों की भूमिका” विषय पर एक विशेष व्याख्यान एवं समझौता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय ने भारतीय राजनीति विज्ञान संघ (IPSA) के साथ शैक्षणिक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय राजनीति विज्ञान संघ के महासचिव एवं कोषाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा थे। कुलगुरु महोदय, कुलसचिव, शिक्षकगण, अधिकारीगण एवं छात्रों ने संयुक्त रूप से उनका हार्दिक स्वागत किया। प्रोफेसर शर्मा ने अपने व्याख्यान में “मानव बुद्धिमत्ता” की मूल अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानव समाज की सृजनात्मक क्षमता का ही प्रतिबिम्ब है।” उन्होंने शिक्षक समुदाय से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने की संस्कृति विकसित करें और आधुनिकता को प्राचीन भारतीय ज्ञान से जोड़कर एक नवीन चिंतन धारा का सृजन करें।

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अतीत से सीखकर भविष्य का निर्माण
कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा, “हमें अतीत से सीखकर ही भविष्य के भारत का निर्माण करना है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमें विश्वगुरु बनाती है और इसमें निहित मानवीय मूल्य और सृजनात्मकता ही आधुनिक समाज की दिशा तय करते हैं।

IPSA के साथ शैक्षणिक सहयोग के नए आयाम
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के निदेशक डॉ. धर्मेश हरवानी ने बताया कि IPSA के साथ हुए इस समझौते के तहत शैक्षणिक सहयोग के नए आयाम स्थापित होंगे। इस MoU के अंतर्गत संयुक्त संगोष्ठियों, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, लघु पाठ्यक्रमों, संयुक्त शोध परियोजनाओं, उच्चस्तरीय प्रकाशनों, शोध क्षेत्रों के विस्तार और दीर्घकालिक सहयोग सहित विविध क्षेत्रों में संयुक्त कार्य किया जाएगा।  समारोह के समापन पर कुलसचिव कुनाल रहाड़ ने सभी गणमान्य अतिथियों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं छात्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध परंपरा को आगे बढ़ाने तथा परंपरा और आधुनिकता के समन्वय से राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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