परमात्मा की कृपा से मिली संपत्ति का करें सदुपयोग: गच्छाधिपति नित्यानंद विजय सूरीश्वर


बीकानेर/उदयरामसर, 17 जनवरी। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी महाराज ने शनिवार को उदयरामसर स्थित ‘सेठ थानमल-नेमीदेवी बोथरा विहार धाम’ में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दान और सेवा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से प्राप्त संपत्ति का वास्तविक मूल्य उसके सदुपयोग और साधु-साध्वियों की सेवा में ही है।


बोथरा विहार धाम में भव्य अभिनंदन
आचार्यश्री शनिवार सुबह गौडी पार्श्वनाथ से विहार कर उदयरामसर पहुंचे, जहां वरिष्ठ श्राविका नेमी देवी, भामाशाह पवन-भारती बोथरा और उदयरामसर संघ के पदाधिकारियों ने गवली (रंगोली) और भजनों के साथ उनका भावभीना स्वागत किया। गच्छाधिपति ने विहार धाम स्थित ‘भगवान भय हरण पार्श्वनाथ जिनालय’ में वंदना की। उन्होंने बोथरा परिवार की उदारता की प्रशंसा करते हुए कहा कि हाईवे पर स्थित यह विहार धाम सभी गच्छों के संतों के लिए एक पावन विश्राम स्थल बनेगा, जिससे निर्माणकर्ताओं को निरंतर आशीर्वाद प्राप्त होगा।


वात्सल्य का अनूठा उदाहरण
समारोह के दौरान आचार्यश्री की करुणा का एक प्रेरक प्रसंग देखने को मिला। लुधियाना से आए वयोवृद्ध और अस्वस्थ श्रावक पूर्णचंद श्रीपाल जैन, जो चलने-फिरने में असमर्थ थे, उनसे मिलने गच्छाधिपति स्वयं चलकर उनकी कार तक गए। वहां उन्होंने श्रावक को मंगलपाठ सुनाकर आशीर्वाद दिया, जिसे देखकर उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया। आचार्यश्री 21 जनवरी को नागौर पहुंचेंगे।








