इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में ‘एआई सुरक्षा’ पर राष्ट्रीय बूटकैंप शुरू
इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में 'एआई सुरक्षा' पर राष्ट्रीय बूटकैंप शुरू


- साइबर हमलों से सुरक्षा का नया कवच
बीकानेर, 24 फरवरी। भविष्य की सबसे जटिल तकनीकी चुनौती ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिक्योरिटी’ पर बीकानेर अब देश को दिशा देगा। इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में सोमवार को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से छह दिवसीय राष्ट्रीय बूटकैंप का भव्य शुभारंभ हुआ। ‘ISEA-III प्रोजेक्ट’ के तहत आयोजित इस विशेष शिविर का मुख्य फोकस एआई प्रणालियों को मैलवेयर और साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने पर है।


बदलती तकनीकों से दो कदम आगे रहना अनिवार्य: संभागीय आयुक्त
समारोह के मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।


उभरती चुनौतियां: मीणा ने कहा कि आज के दौर में साइबर हमलावर पल-पल अपनी तकनीक बदल रहे हैं। ऐसे में हमारी रक्षा प्रणालियों का उनसे दो कदम आगे रहना अनिवार्य है।
मजबूत डिफेंस तंत्र: उन्होंने विद्यार्थियों और विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे एआई के बढ़ते खतरों को समझें और एक ऐसा अभेद्य साइबर डिफेंस तंत्र विकसित करें जो भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
देश के 50 शीर्ष संस्थानों का नेटवर्क और 200 प्रतिभागी
प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि MeitY का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट देश के 10 अलग-अलग क्लस्टरों में कार्य कर रहा है।
प्रतिष्ठित भागीदारी: इस नेटवर्क में आईआईटी, एनआईटी और देश के 10 प्रमुख राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं।
हाइब्रिड मोड: इस बूटकैंप में हाइब्रिड मोड के जरिए देश भर से 200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे।
विशेषज्ञ व्याख्यान: आगामी 6 दिनों में आईआईटी बॉम्बे, एमनआईटी जयपुर और कनाडाई साइबर सुरक्षा संस्थान जैसे संस्थानों के दिग्गज वैज्ञानिक ‘मैलवेयर डिटेक्शन’ और ‘एडवर्सरियल डिफेंस’ की बारीकियां सिखाएंगे।
तकनीकी कौशल और भविष्य के रोजगार पर जोर
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलसचिव श्रीमती रचना भाटिया ने कहा कि एआई की चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘ग्रास रूट’ इंजीनियरिंग कौशल को निखारना समय की मांग है। वहीं इंजीनियरिंग कॉलेज के कुलसचिव डॉ. अमित सोनी ने एआई सुरक्षा को भविष्य में रोजगार के बदलते स्वरूप का एक बड़ा आधार बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा प्रजापत ने किया। इस दौरान बीटीयू के वित्त अधिकारी हनुमान प्रसाद और यूसीईटी प्राचार्य डॉ. परबन्त सिंह भी मौजूद रहे। यह प्रशिक्षण शिविर 28 फरवरी तक चलेगा, जिसमें हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग सत्रों के माध्यम से शोधार्थियों को साइबर सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरणों का अनुभव प्रदान किया जाएगा।
