समुदाय की पहली बेटी बनी सरकारी अफसर, नीलम बावरी ने रच दिया इतिहास

समुदाय की पहली बेटी बनी सरकारी अफसर, नीलम बावरी ने रच दिया इतिहास
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर , 16 फ़रवरी । बीकानेर की होनहार बेटी नीलम बावरी ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। आरएलजी बालिका सशक्तिकरण संस्थान द्वारा नीलम को उनके शानदार चयन पर ‘बालिका गौरव सम्मान’ से नवाजा गया है। नीलम का चयन एसएससी जीडी (SSC GD) में हुआ है और उन्हें बीएसएफ (BSF) अकादमी ग्वालियर में पोस्टिंग मिली है। नीलम अपने समुदाय की पहली ऐसी बालिका हैं, जिन्होंने सरकारी नौकरी हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

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नीलम की यह यात्रा चुनौतियों से भरी रही है। बीकानेर के हुसंगसर गांव के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली नीलम के पिता जगतार सिंह और माता सलुन कौर ने अभावों के बावजूद अपनी बेटी के सपनों को पंख दिए। नीलम ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने परिवार के अटूट विश्वास और अपने गुरु पुखराज मेघवाल के कुशल मार्गदर्शन को दिया है।

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अनुशासन और पसीने से मिली सफलता: गुरु का मार्गदर्शन रहा अहम
सम्मान समारोह के दौरान नीलम ने साझा किया कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान उनके गुरु पुखराज मेघवाल ने उन्हें केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि शारीरिक अभ्यास, डाइट, फिटनेस और कड़े अनुशासन के लिए भी तैयार किया। घर की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता और चार भाई-बहनों ने उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखने दिया। नीलम की यह उपलब्धि उन हजारों ग्रामीण बालिकाओं के लिए एक मिसाल है, जो सेना या पुलिस बल में जाकर देश सेवा करना चाहती हैं।

बालिका सशक्तिकरण का नया चेहरा: डॉ. अर्पिता गुप्ता का आह्वान
संस्थान की चेयरपर्सन डॉ. अर्पिता गुप्ता ने नीलम को सम्मानित करते हुए कहा कि ‘बालिका गौरव सम्मान’ उन बेटियों को प्रोत्साहित करने का एक प्रयास है, जिन्होंने अपने हौसलों से बाधाओं को पार किया है। डॉ. गुप्ता ने कहा, “नीलम की सफलता आत्मनिर्भर बनने की चाह रखने वाली हर बालिका के लिए एक प्रेरणा है। हमारा संस्थान भविष्य में भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की ऐसी ही प्रतिभावान बेटियों के जज्बे को सलाम करता रहेगा।”

डॉ. गुप्ता ने इस अवसर पर अभिभावकों से भी मार्मिक अपील की कि वे अपनी बेटियों को बेटों के समान अवसर प्रदान करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्नेहा शर्मा, शगुन सोलंकी और शारदा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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