चिकित्सा क्षेत्र में पीबीएम का बड़ा धमाका; राजस्थान की पहली ‘ऑर्थो बायोलॉजिकल लैब’ शुरू, अब बिना ऑपरेशन ठीक होंगी हड्डियां

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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 06 जनवरी। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रॉमा सेंटर ने मंगलवार को चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास रच दिया है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (OBRC) लैब का सफल ट्रायल शुरू किया गया। इस क्रांतिकारी तकनीक के आने से अब स्पोर्ट्स इंजरी और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियों के लिए मरीजों को चीर-फाड़ या जटिल ऑपरेशनों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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मरीज के खून से ही तैयार होगा ‘इलाज का टीका’

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ट्रॉमा हॉस्पिटल प्रभारी और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोटिया ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए बताया कि ओबीआरसी एक प्राकृतिक उपचार पद्धति है। इसमें मरीज के स्वयं के रक्त (Blood) या बोन मैरो से प्राप्त घटकों को संकेंद्रित कर एक विशेष ‘उपचार टीका’ तैयार किया जाता है।

प्राकृतिक रिकवरी: यह पद्धति शरीर की प्राकृतिक हीलिंग शक्ति को बढ़ाती है और क्षतिग्रस्त टिशू को खुद रिपेयर करने में मदद करती है।

कोई साइड इफेक्ट नहीं: चूंकि इसमें मरीज का अपना ही रक्त उपयोग होता है, इसलिए इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

1 घंटे में इलाज कराकर घर जा सकेंगे मरीज
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि यह पूरी तरह से ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है। मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होगी; वह मात्र एक घंटे में उपचार लेकर अपने घर जा सकेगा।

इन बीमारियों में कारगर: स्पोर्ट्स इंजरी, फ्रोजन शोल्डर, टेनिस एल्बो, घुटने का दर्द (आर्थराइटिस ग्रेड 1, 2, 3), एंकल पेन, डिस्क प्रोलैप्स और हड्डियों के न जुड़ने जैसी समस्याओं में यह तकनीक रामबाण सिद्ध होगी।

पीबीएम अधीक्षक ने किया लैब का शुभारंभ
लैब के ट्रायल अवसर पर पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने कहा कि यह लैब न केवल मरीजों के लिए वरदान है, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होगी। डॉ. घीया ने घोषणा की कि अस्पताल में इस तकनीक से इलाज के लिए एक विशेष दिन निर्धारित किया जाएगा और यह पूर्णतः निशुल्क होगा।

भामाशाहों का सहयोग और भविष्य की योजनाएं
इस अत्याधुनिक लैब की स्थापना में नोखा के भामाशाह मघाराम कुलरिया का विशेष आर्थिक सहयोग रहा है। साथ ही एमपी-एमएलए फंड से भी संसाधन जुटाने के प्रयास जारी हैं। डॉ. अजय कपूर और डॉ. बी.एल. खजोटिया पिछले 5 वर्षों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। आगामी चरण में यहाँ ‘ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्च सेंटर’ की स्थापना भी की जाएगी।  समारोह के दौरान वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर सहित ट्रॉमा अस्पताल के अन्य रेजिडेंट डॉक्टर्स और चिकित्सा कर्मी उपस्थित रहे।

भीखाराम चान्दमल 15 अक्टूबर 2025
mmtc 2 oct 2025

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