बीकानेर में साध्वी ऋतंभरा की भागवत कथा और धर्म संसद की तैयारियां तेज; शिष्य सत्यशील महाराज ने जांची व्यवस्थाएं


बीकानेर, 17 जनवरी। मरुधरा की पावन धरा बीकानेर में आगामी फरवरी माह में सनातन धर्म का बड़ा समागम होने जा रहा है। सनातन धर्म रक्षा समिति के बैनर तले 22 से 28 फरवरी तक प्रखर वक्ता वात्सल्य मूर्ति साध्वी ऋतंभरा के मुखारविंद से ‘श्रीमद्भागवत कथा’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की पूर्व तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए साध्वी जी के शिष्य सत्यशील महाराज शुक्रवार को बीकानेर पहुंचे।


पॉलिटेक्निक ग्राउंड और निवास स्थलों का निरीक्षण
सत्यशील महाराज ने मुख्य कथा स्थल पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने साध्वी ऋतंभरा के प्रवास के लिए प्रस्तावित स्थानों, जिनमें मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. गुंजन सोनी और भाजपा नेता दिलीप पुरी के निवास के साथ-साथ एक होटल की व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, का अवलोकन किया। उन्होंने आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया।


27 फरवरी को बीकानेर में जुटेगी संतों की ‘धर्म संसद’
इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण 27 फरवरी को होने वाली भव्य ‘धर्म संसद’ होगी। पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में आयोजित होने वाली इस संसद में देशभर के शीर्ष संत-महात्मा शामिल होंगे। साध्वी ऋतंभरा के सान्निध्य में होने वाली इस चर्चा का मुख्य केंद्र सनातन धर्म का उत्थान, गोरक्षा और राष्ट्रवाद होगा। इसके साथ ही कथा के दौरान 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ भी संपन्न होगा।
सिलवा मूलवास में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ की तैयारी
बीकानेर के बाद 28 फरवरी को नोखा तहसील के सिलवा मूलवास में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सत्यशील महाराज ने वहां स्थित ‘नरसी विला’ का दौरा किया और ब्रह्मलीन दुलारामजी कुलरिया के फलसे का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध उद्योगपति व समाजसेवी भंवर कुलरिया और प्रेम कुलरिया से कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की। कुलरिया परिवार और आयोजन समिति ने महाराज का गर्मजोशी से स्वागत और सम्मान किया।
समिति के सदस्य रहे सक्रिय
निरीक्षण के दौरान सनातन धर्म रक्षा समिति के संस्थापक सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, अध्यक्ष अनिल सोनी (झूमर सा), यज्ञाचार्य सिद्धार्थ पुरोहित, गोपाल भादाणी, सुनील यादव, राजेंद्र चुग और कैलाश छंगाणी सहित कई गणमान्य जन सत्यशील महाराज के साथ रहे।








