विवेकानंद संस्कृति और धर्म के सेतु थे, करुणा क्लब ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर किया महापुरुष का स्मरण

विवेकानंद संस्कृति और धर्म के सेतु थे,
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quicjZaps 15 sept 2025

 

बीकानेर, 12 जनवरी । लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में करुणा इंटरनेशनल संस्था के करुणा क्लब तत्वावधान में सोमवार, 12 जनवरी 2026 को महान संन्यासी योद्धा स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। ‘लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन’ में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में वक्ताओं ने विवेकानंद के सिद्धांतों को आधुनिक भारत के निर्माण की आधारशिला बताया।

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समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने विवेकानंद को ‘संस्कृति एवं धर्म का सेतु’ बताते हुए कहा कि उन्होंने विश्व पटल पर भारतीय अध्यात्म का लोहा मनवाया। रंगा ने रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद के जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कैसे एक शिष्य ने अपने गुरु के संदेश को वैश्विक पहचान दिलाई। शाला प्राचार्य राजेश रंगा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विवेकानंद के अमर उद्घोष— ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल न मिल जाए’ को आत्मसात करने की सीख दी। इस दौरान उन्होंने प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा द्वारा विवेकानंद पर रचित कविता ‘सदियों का सूरज’ का प्रभावी वाचन भी किया।

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कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ जीवन में कभी भी नशा न करने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। करुणा क्लब प्रभारी हरिनारायण आचार्य ने विवेकानंद के जीवन के रोचक प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को चरित्र निर्माण के लिए प्रेरित किया। वहीं, प्रतीक आचार्य ने देशभक्ति के गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा सदन राष्ट्रभक्ति के स्वर में सराबोर हो गया।

युवा शिक्षाविद् आशिष रंगा के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने नई पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ने का सफल प्रयास किया। संस्था के सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों का संचार होगा।

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