मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन: भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत

मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन
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quicjZaps 15 sept 2025
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मुंबई ,12 अप्रैल। भारतीय पार्श्व गायन की दुनिया की बेताज मलिका, आशा भोसले का रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। वे 92 वर्ष की थीं। उनके निधन की खबर से न केवल फिल्म जगत, बल्कि पूरे देश और दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

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अंतिम समय और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी

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अस्पताल सूत्रों के अनुसार, आशा जी को शनिवार शाम को छाती में संक्रमण (Chest Infection) और अत्यधिक थकान के कारण भर्ती कराया गया था। रविवार दोपहर को ‘मल्टी-ऑर्गन फेल्योर’ के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे आनंद भोसले ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की।

एक अतुलनीय संगीत यात्रा (1943–2026)

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उन्होंने मात्र 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और पिछले आठ दशकों से अपनी जादुई आवाज से लोगों का मनोरंजन कर रही थीं।

वर्सेटाइल वॉइस: उन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल, कव्वाली से लेकर पॉप और कैबरे तक हर विधा में अपनी छाप छोड़ी।

विश्व रिकॉर्ड: उन्होंने हिंदी सहित 20 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाए। उनका नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में दर्ज है।

प्रमुख पुरस्कार: उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण (2008) और सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2000) से नवाजा गया था।

अंतिम संस्कार की जानकारी

उनके पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए उनके पेडर रोड स्थित निवास ‘कैसा ग्रांडे’ (Casa Grande) में रखा गया है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को दोपहर 4:00 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

देशभर से श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री: “आशा जी की आवाज ने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। उनका जाना संगीत जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।”

आमिर खान: “यह एक युग का अंत है। हम सभी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनकी कमी हमेशा खलेगी।”

ए.आर. रहमान: “संगीत की देवी अब अमर हो गईं। उनकी प्रेरणा हमेशा हमारे साथ रहेगी।”

लता मंगेशकर के बाद आशा भोसले का जाना भारतीय संगीत के उस ‘स्वर्णिम अध्याय’ का समापन है, जिसकी गूंज सदियों तक बनी रहेगी।