शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज कल नागणेची माता से लेगा होली की अनुमति; निकलेगी पहली गेर

शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज कल नागणेची माता से लेगा होली की अनुमति; निकलेगी पहली गेर
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025
  • बीकानेर में होलका का आगाज

बीकानेर, 22 फरवरी। छोटी काशी के नाम से विख्यात बीकानेर शहर में होली के हुड़दंग और रम्मतों के दौर का विधिवत श्रीगणेश कल, 23 फरवरी 2026 (फाल्गुन सुदी सप्तमी) को होने जा रहा है। रियासतकालीन परंपरा को जीवंत रखते हुए शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज ‘खेलनी सातम’ के अवसर पर राजपरिवार की कुलदेवी माता नागणेची के दरबार में हाजिरी लगाकर होली खेलने की अनुमति मांगेगा।
इस आयोजन के साथ ही बीकानेर में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा और शहर पूरी तरह फाग के रंग में सराबोर हो जाएगा।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

माता के चरणों में इत्र-गुलाल और भजनों की स्वरलहरी
भाई बंधु ट्रस्ट की अध्यक्षा कामिनी विमल भोजक ‘मैया’ ने बताया कि सप्तमी के दिन समाज के स्त्री-पुरुष पारंपरिक परिधानों में माता नागणेची मंदिर प्रांगण में एकत्रित होंगे।

pop ronak

विशेष अरदास: रात्रि 8 बजे आरती के समय माता रानी को विशेष इत्र और गुलाल अर्पित कर शहर में होली महोत्सव शुरू करने की अनुमति मांगी जाएगी।

भजन संध्या: ‘हंस चढ़ी मां आई भवानी रे’, ‘प्रेम रस री मेंहदी राचलड़ी’ और ‘निम्बूडो’ जैसे पारम्परिक भजनों से माता को रिझाया जाएगा।

परंपरा: गुलाल उछालकर होलका का आगाज किया जाएगा, जिसके बाद शहर के चौक-चौराहों पर रम्मतों और फाग गीतों का सिलसिला शुरू होगा।

निकलेगी ‘होली की पहली गेर’: पुराने शहर में दिखेगी रौनक
महामंत्री नितिन वत्सस ने बताया कि इस उत्सव की सबसे खास बात रात्रि को निकलने वाली ‘होली की पहली गेर’ है।

मार्ग: देर रात्रि को समाज के बुजुर्ग और युवा माता के मंदिर से गेर लेकर निकलेंगे, जो गोगागेट से शहर में प्रवेश करेगी। यह गेर बागड़ी मोहल्ला, भुजिया बाजार, चाय पट्टी, वैदों का बाजार, मरूनायक चौक और चौधरियों की घाटी होते हुए मूंधाड़ा सेवागों के चौक में संपन्न होगी।

सामूहिक भोज: इस दिन समाज के विभिन्न प्रन्यासों जैसे मूंधाड़ा प्रन्यास भवन, हसावतों की तलाई, सूर्य भवन और जनेश्वर भवन में सामूहिक प्रसाद (भोग) का आयोजन किया जाएगा।

तैयारियों में जुटा समाज
इस ऐतिहासिक परंपरा को भव्य रूप देने के लिए राजा सेवग, अजय कुमार शर्मा, सुशील सेवग (लालजी), दीनानाथ सेवग और संजय शर्मा (मनु भाईजी) सहित समाज के अनेक युवा और प्रबुद्धजन तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। बीकानेर की यह अनूठी परंपरा दर्शाती है कि यहाँ आज भी उत्सवों की शुरुआत शक्ति की भक्ति के साथ होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *