27 वर्षीय अरिहंत पुगलिया की 15 दिवसीय तपस्या, बोथरा भवन में हुआ भव्य अभिनंदन

27 वर्षीय अरिहंत पुगलिया की 15 दिवसीय तपस्या, बोथरा भवन में हुआ भव्य अभिनंदन
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बीकानेर (गंगाशहर), 22 फरवरी। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के तत्वावधान में रविवार को बोथरा भवन में एक विशेष ‘तप अभिनंदन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह समारोह मुनि श्री अमृत कुमार जी के पावन सान्निध्य में युवा तपस्वी अरिहंत पुगलिया द्वारा की गई 15 दिवसीय कठिन तपस्या (15 उपवास) की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में रखा गया। अरिहंत पुगलिया ने मात्र 27 वर्ष की अल्पायु में 15 दिनों तक निराहार रहकर 32 भक्त प्रत्याख्यान (आगमिक तप) किया, जिसे समाज के लिए एक महान आध्यात्मिक उपलब्धि माना जा रहा है।

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“तपस्या वीरों का आभूषण है” — मुनि श्री अमृत कुमार
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुनि श्री अमृत कुमार जी ने तप के महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रेरणादायी युवा: मुनि श्री ने कहा कि उच्च मनोबल के बिना ऐसी कठिन तपस्या संभव नहीं है। आज के दौर में जब युवा भौतिकवाद की ओर भाग रहे हैं, अरिहंत जैसे युवाओं का धर्म और तप की ओर झुकना पूरे समाज के लिए गौरव की बात है।
तप और स्वास्थ्य: उन्होंने बताया कि नियमित तपस्या, नवकारसी और रात्रि भोजन का त्याग न केवल कर्मों की निर्जरा करता है, बल्कि शरीर को बड़ी बीमारियों से मुक्त कर स्वस्थ भी रखता है।मुनि वृंदों ने तपस्या के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन में अहिंसा के पालन पर जोर दिया।
संयम और अहिंसा का संदेश

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कार्यक्रम में मुनि श्री प्रबोध कुमार जी ने तपस्वी जनों से कहा कि तपस्या में वाहनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अनावश्यक पापों से बचने का प्रयास करना चाहिए। तपस्या के साथ जप ओर ध्यान का प्रयोग करना चाहिए। मुनि श्री ने वायुकाय के जीवों की हिंसा से बचने की प्रेरणा प्रदान की।
तप अभिनन्दन के कार्यक्रम में बोलते हुए मुनि श्री उपशम कुमार जी ने कहा कि असंयमित भोजन बीमारियों की जड़ है। बेमेल भोजन करने से भी अनेक बीमारियां उत्पन्न हो जाती है। मुनि श्री ने प्रति माह एक उपवास करने व रात्रि भोजन का त्याग करने की प्रेरणा प्रदान की।

साहित्य और पताका से सम्मान
कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के मंत्री जतनलाल संचेती ने तपस्या को कर्म निर्जरा का सबसे शक्तिशाली माध्यम बताया। आत्मा को उज्जवल, पवित्र बनाने, कर्म मुक्त बनाने के लिए तपस्या बहुत जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में सभा अध्यक्ष नवरतन बोथरा, मंत्री जतनलाल संचेती और देवेन्द्र डागा ने तपस्वी अरिहंत पुगलिया को धार्मिक साहित्य और ‘तपस्या की पताका’ भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर गंगाशहर क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे, जिन्होंने तपस्वी की अनुमोदना की।

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