सफलता का सूत्र- 99 वर्षीय उद्योगपति महावीर मानसिंहका ने बीकानेर के उद्यमियों को सिखाए व्यापारिक संस्कार
सफलता का सूत्र- 99 वर्षीय उद्योगपति महावीर मानसिंहका ने बीकानेर के उद्यमियों को सिखाए व्यापारिक संस्कार


बीकानेर, 19 फरवरी। बीकानेर प्रवास पर पधारे नागपुर के प्रतिष्ठित तेल व्यवसायी और वयोवृद्ध उद्योगपति महावीर मानसिंहका ने गुरुवार को बीकानेर जिला उद्योग संघ में उद्यमियों के साथ अपने जीवन के अनुभवों का खजाना साझा किया। 99 वर्ष की आयु में भी ऊर्जा से भरपूर मानसिंहका ने सफल उद्योग के संचालन के लिए मशीनरी और तकनीक से अधिक मानवीय मूल्यों और सेवा भाव को महत्वपूर्ण बताया। उनका मार्गदर्शन पाने के लिए बीकानेर के कई दिग्गज उद्योगपति एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाने की बारीकियां सिखाईं।


“प्रतिस्पर्द्धी या श्रमिक, किसी का दिल दुखाकर व्यापार न करें”
सफल कारोबार का मूल मंत्र देते हुए महावीर मानसिंहका ने कहा कि यदि आपका उद्योग किसी व्यक्ति का दिल दुखाकर किया जा रहा है—चाहे वह आपका प्रतिस्पर्द्धी हो या आपका श्रमिक—तो वह लंबी सफलता नहीं दिला सकता। उन्होंने जीवन के दो मुख्य स्तंभ बताए:


नैतिक व्यापार: कभी किसी का अहित न करें।
सेवा भाव: अपनी कमाई का एक विशेष हिस्सा ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव से संचित करें। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जब आप समाज के लिए सोचते हैं, तो प्रकृति स्वयं आपके कारोबार को प्रसिद्धि दिलाने में जुट जाती है।
पुराने समय की चुनौतियां और अनुभव की शक्ति
मानसिंहका ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि पुराने समय में आज जैसी आधुनिक मशीनरी उपलब्ध नहीं थी। उस दौर में उद्योगपतियों को खुद अपने हाथों से कठिन परिश्रम करना पड़ता था। यही कारण है कि पुराने समय के उद्यमियों के पास आज की युवा पीढ़ी की तुलना में अधिक कार्य क्षमता और गहरा अनुभव है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे तकनीक के साथ-साथ जमीनी अनुभव को भी महत्व दें।
जिला उद्योग संघ की आर्ट गैलरी की सराहना
बीकानेर जिला उद्योग संघ की साज-सज्जा और वहां निर्मित आर्ट गैलरी को देखकर मानसिंहका अभिभूत हो गए। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे पूरे बीकानेर की संस्कृति को एक ही छत के नीचे लाकर जीवंत कर दिया गया हो।
संस्कारों का संरक्षण: अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पचीसिया ने बताया कि इस गैलरी का उद्देश्य नई पीढ़ी को मोबाइल की काल्पनिक दुनिया से बाहर निकालकर बीकानेर के संस्कारों, तीज-त्योहारों और यहाँ के समृद्ध उद्योग धंधों से रूबरू करवाना है।
छोटी काशी का गौरव: पचीसिया ने बीकानेर को ‘छोटी काशी’ बताते हुए यहाँ के भामाशाहों की परंपरा से अवगत कराया, जो समाज से अर्जित धन को पुनः समाज के उत्थान में लगाने की सीख देते हैं।
इस अवसर पर वी.के. मानसिंहका, नाथूलाल अग्रवाल, नरेश मित्तल, प्रमोद देवड़ा, सुशील बंसल, अनन्तवीर जैन और वीरेंद्र किराडू सहित अनेक गणमान्य उद्यमी उपस्थित रहे।
