राजस्थली पत्रिका के स्वर्ण जयंती वर्ष में 51 विद्वानों का सम्मान

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बीकानेर/श्रीडूंगरगढ़, 28 अगस्त। राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति के सहयोगी संस्थान मरुभूमि शोध संस्थान, श्रीडूंगरगढ़ द्वारा प्रकाशित त्रैमासिकी पत्रिका ‘राजस्थली’ 1 सितंबर, 2025 को अपने 50वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। पत्रिका के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में, पूरे साल साहित्यिक, सांस्कृतिक और शोध से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान, साहित्य, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 51 विद्वानों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।
राजस्थानी भाषा की ‘लोक मान्यता’ का प्रतीक
संस्था के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि राजस्थली देश की एकमात्र ऐसी राजस्थानी भाषा की पत्रिका है, जो स्वर्ण जयंती मनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आठवीं अनुसूची में शामिल न किए जाने और राज्य सरकार द्वारा ‘स्टेट लैंग्वेज’ का दर्जा न दिए जाने के बावजूद, इस पत्रिका का 50 वर्षों तक जारी रहना राजस्थानी भाषा की लोक मान्यता को दर्शाता है। संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. मदन सैनी ने जानकारी दी कि वर्ष भर कार्यक्रमों के साथ, राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अंक और कई नवाचार भी प्रस्तावित हैं।

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महिलाओं और बाल साहित्य के लिए सम्मान
इस कड़ी में, गत वर्ष शुरू किए गए दो नए सम्मान – श्री सूर्य प्रकाश बिस्सा स्मृति राजस्थानी महिला लेखन सम्मान और कला-डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान – के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई हैं। ये सम्मान राजस्थानी भाषा के विकास और महिला व बाल साहित्य को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए थे।

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आवश्यक शर्तें:

पांडुलिपि: केवल मौलिक और अप्रकाशित साहित्यिक पांडुलिपियाँ ही विचार के लिए भेजी जा सकती हैं।

पृष्ठ संख्या: महिला लेखन के लिए 96 से 128 पृष्ठ और बाल साहित्य के लिए 64 से 72 पृष्ठ की पांडुलिपि होनी चाहिए।

भेजने की अंतिम तिथि: 20 अक्टूबर, 2025 तक पांडुलिपि की एक स्पष्ट मुद्रित प्रति और एक सॉफ्ट कॉपी (ईमेल के माध्यम से) सचिव, मरुभूमि शोध संस्थान, श्रीडूंगरगढ़ के पते पर पहुँच जानी चाहिए। चयनित पांडुलिपि को संस्थान द्वारा मुफ्त में प्रकाशित किया जाएगा और मातृभाषा दिवस पर उसका विमोचन होगा। लेखक को समारोह में सम्मान के साथ प्रकाशित कृति की 41 प्रतियां भेंट की जाएंगी।

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