बिहार में महागठबंधन को बड़ा झटका- JMM ने अकेले चुनाव लड़ने का किया ऐलान, ‘सम्मान न मिलने’ से नाराज़

JMM पार्टी महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य
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झामुमो छह सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार; आरजेडी-कांग्रेस पर ‘बड़ी भाई’ वाली राजनीति करने का आरोप

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पटना (विशेष संवाददाता), 19 अक्टूबर। बिहार की सियासत में एक और बड़ा उलटफेर हो गया है। झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने महागठबंधन से अलग होकर बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार की छह विधानसभा सीटों – धमदाहा, चकाई, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती – पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। JMM के इस कदम ने न सिर्फ बिहार के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित किया है, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर की असहजता को भी उजागर किया है।

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‘साथ दिया, पर सम्मान नहीं मिला’: JMM की शिकायत

JMM नेताओं ने महागठबंधन से अलग होने का मुख्य कारण ‘सम्मान न मिलना’ बताया है। पार्टी महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि उन्होंने RJD और कांग्रेस से कई बार संपर्क किया और उन क्षेत्रों की जानकारी दी जहां JMM का मजबूत जनाधार है।
भट्टाचार्य ने कहा, “हमने झारखंड में उन्हें समर्थन दिया था, लेकिन अब बिहार में हमें नज़रअंदाज़ किया गया। यह साझेदारी नहीं, एकतरफा राजनीति बन गई थी।” उन्होंने ज़ोर दिया कि JMM का गुस्सा केवल सीटों के बंटवारे पर नहीं, बल्कि गठबंधन के अंदर पनप रही उपेक्षा की राजनीति पर है।

‘शिबू सोरेन की पार्टी, आत्मसम्मान से समझौता नहीं’

JMM के वरिष्ठ नेता मनोज पांडे ने आत्मसम्मान का मुद्दा उठाते हुए कहा, “हम शिबू सोरेन की पार्टी हैं, हमने हमेशा आदिवासियों और वंचितों के अधिकार के लिए संघर्ष किया है। जब बिहार में हमारी बारी आई, तो हमें ‘छोटा दल’ समझ लिया गया।” उन्होंने साफ किया कि अब पार्टी गठबंधन की गुलामी नहीं, सम्मान की राजनीति करेगी।
JMM ने जिन छह सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, उन्हें पार्टी अपने संघर्ष की पहचान मानती है। JMM नेताओं का कहना है कि इन सीटों को RJD या कांग्रेस के खाते में डालने की कोशिश जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ धोखा थी, जिसके बाद पार्टी ने “अपनी लड़ाई खुद लड़ने” का फैसला किया।

RJD-कांग्रेस पर ‘बड़ी भाई’ वाली राजनीति का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे की बातचीत पिछले दो महीनों से अटकी थी, जिसमें RJD करीब 165 सीटों पर दावा कर रही थी और कांग्रेस को 50 से कम सीटें देने को तैयार थी। JMM के हिस्से में कितनी सीटें आएंगी, इस पर कोई ठोस चर्चा ही नहीं हुई। RJD द्वारा JMM की उपस्थिति को केवल ‘सांकेतिक सहयोग’ मानकर टाल देने के रवैये से JMM नेताओं का सब्र टूट गया।

JMM का यह कदम INDIA गठबंधन के भीतर बढ़ती बेचैनी का पहला स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जहां छोटे दलों में यह नाराज़गी पहले से ही थी कि बड़ी पार्टियाँ सहयोगियों को बराबरी का दर्जा नहीं देतीं।

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