ट्रंप के 500% टैरिफ बिल पर भारत का करारा जवाब- ‘दबाव में नहीं बदलेगी देश की ऊर्जा नीति’


नई दिल्ली/बीकानेर, 9 जनवरी । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक दंडात्मक टैरिफ लगाने के प्रस्तावित बिल (Sanctioning of Russia Act 2025) पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक बाजार से सस्ता ईंधन खरीदने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता है।


अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए गए इस विवादित बिल को ट्रंप ने अपना समर्थन दिया है, जिसका सीधा असर भारत, चीन और ब्राजील जैसे बड़े आयतकों पर पड़ सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, “एनर्जी सोर्सिंग के सवाल पर हमारा रुख जगजाहिर है। हम वैश्विक बाजार के बदलते समीकरणों और अपने नागरिकों की जरूरतों के आधार पर विभिन्न स्रोतों से सस्ती ऊर्जा हासिल करना जारी रखेंगे।” भारत सरकार ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल न खरीदने का भरोसा दिया है।


रूसी तेल: अर्थव्यवस्था की जरूरत बनाम कूटनीतिक दबाव
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल आयात को काफी बढ़ाया था, जो 0.2% से बढ़कर 40% तक पहुंच गया था। हालांकि, जनवरी 2025 में ट्रंप की वापसी के बाद से दबाव लगातार बढ़ रहा है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर पहले ही 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ की धमकियों के चलते दिसंबर 2024 में रूसी तेल की खरीद 18 लाख बैरल से घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े समूहों ने भी जनवरी 2026 में रूसी तेल की डिलीवरी न मिलने की पुष्टि की है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले और ताइवान संकट पर भी रखी राय
इसी प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रवक्ता ने कहा कि चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के घरों और व्यवसायों पर हो रहे हमलों को ‘निजी दुश्मनी’ बताना अपराधियों को बढ़ावा देने जैसा है। भारत ने बांग्लादेश सरकार से इन मामलों में सख्ती से निपटने का आग्रह किया है। वहीं, ताइवान सीमा के पास चीन के सैन्य अभ्यास पर भारत ने चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र की शांति को प्राथमिकता देने की अपील की।








