बीकेईएसएल अधिकारी पर तलवार से हमले के आरोपी जेल भेजे गए
सड़क दुर्घटना के पीड़ित को मिला न्याय, न्यायालय ने ₹26.77 लाख से अधिक का मुआवजा किया मंजूर


कोर्ट ने 22 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में रखने के दिए आदेश


बीकानेर, 9 जनवरी। बीकानेर में बिजली चोरी रोकने गए बिजली कंपनी बीकेईएसएल (BKESL) के अधिकारी पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ कानून का शिकंजा कस गया है। शुक्रवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी अकबर और उसके साथी सिकंदर को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 22 जनवरी तक न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया है। इससे पहले एक अन्य आरोपी शौकत को पुलिस ने वारदात के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था।


मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी की ओर से एडवोकेट तेज करण सिंह ने आरोपियों की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह कार्रवाई उस घटना के विरोध में हुई है जिसमें बिजली का अवैध कनेक्शन (हुकिंग) काटने के दौरान ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी गई और बाद में उन पर तलवार से प्रहार किया गया।
क्या था पूरा मामला ?
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, बीकेईएसएल के अधिकारी लक्ष्मण चौधरी अपने सहायक अभियंता के साथ गैरसरिया और पठानों के मोहल्ले में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चला रहे थे। इस दौरान उन्होंने आरोपी अकबर और उसकी भांजी शौकत के अवैध कनेक्शन काट दिए। इससे आक्रोशित होकर आरोपियों ने अधिकारी लक्ष्मण चौधरी को धमकी दी और शाम को योजनाबद्ध तरीके से उन पर तलवार से हमला कर दिया। इस हमले में लक्ष्मण चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपी अकबर पिछले एक महीने से अधिकारियों को धमका रहा था।
हत्या के प्रयास सहित संगीन धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें मुख्य रूप से हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) और लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने के लिए गंभीर चोट पहुँचाना शामिल है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इन धाराओं के तहत सिद्ध दोष होने पर अपराधियों को 10 साल तक की जेल हो सकती है। बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी बिजली चोरी और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
