बारामती में ‘भीमथड़ी’ अश्व शो का सफल आयोजन; बीकानेर के वैज्ञानिक डॉ. मेहता के मार्गदर्शन में हुआ महाकुंभ
बारामती में 'भीमथड़ी' अश्व शो का सफल आयोजन


बीकानेर/बारामती, 22 जनवरी। महाराष्ट्र के बारामती शहर में ‘आल इंडिया भीमथड़ी हॉर्स सोसाइटी’ द्वारा आयोजित तीसरा भीमथड़ी घोड़ा शो एवं अश्व-खेल प्रतियोगिता अपनी भव्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण देशभर के अश्व प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। बीकानेर स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE) के प्रभागाध्यक्ष डॉ. एस.सी. मेहता के तकनीकी मार्गदर्शन में आयोजित इस शो ने लुप्तप्राय मानी जाने वाली ‘भीमथड़ी’ नस्ल को राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान दिलाई है।


दिग्गजों की मौजूदगी और वैज्ञानिक कार्यशाला


इस गरिमामय आयोजन में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। डॉ. मेहता ने बताया कि यह शो पारंपरिक अश्व प्रदर्शनों से भिन्न था, क्योंकि इसमें केवल घोड़ों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय वैज्ञानिक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में भीमथड़ी नस्ल के संरक्षण की भविष्य की योजनाओं और आगामी रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।
रोमांचक अश्व-खेल प्रतियोगिताओं ने जीता दिल
सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष रणजीत पवार और उनकी टीम के नेतृत्व में दो दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक अश्व पालकों ने भाग लिया। पहली बार इस नस्ल के घोड़ों के साथ ‘अश्व-खेल’ (Equestrian Sports) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें:
- पोल बेंडिंग
- बॉल एंड बकेट
- की-होल रेस प्रमुख रहीं। हजारों दर्शकों ने इन खेलों को रुचिपूर्वक देखा, जिससे सिद्ध हुआ कि भीमथड़ी घोड़े न केवल अपनी सहनशक्ति बल्कि अपनी चपलता के लिए भी उत्कृष्ट हैं।
मान्यता के बाद संरक्षण का अनूठा उदाहरण
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में डॉ. मेहता के शोध प्रयासों से ही भीमथड़ी को देश की 8वीं मान्यता प्राप्त अश्व नस्ल का दर्जा मिला था। डॉ. मेहता ने चिंता व्यक्त की कि अक्सर नस्लों को मान्यता मिलने के बाद भुला दिया जाता है, लेकिन रणजीत पवार के मार्गदर्शन में यह सोसाइटी इस नस्ल के संवर्धन हेतु निरंतर सक्रिय है।
इस आयोजन की सफलता में सुश्री इरा पवार, केशव जोशी, दिलीप जोशी और सचिन जगताप सहित कई अश्व विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के अंत में नस्ल के सर्वश्रेष्ठ घोड़ों और घोड़ियों को पुरस्कृत किया गया।
