गजनेर में गूंजी राजस्थानी कविता की महक, बाबू बमचकरी के नए संग्रह का हुआ लोकार्पण
बाबू बमचकरी के नए संग्रह का हुआ लोकार्पण


बीकानेर/गजनेर, 9 फरवरी। राजस्थानी और हिंदी साहित्य के प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि बाबूलाल छंगाणी ‘बमचकरी’ के नव-प्रकाशित राजस्थानी कविता संग्रह ‘ईं बात रो झोड़ है’ का भव्य लोकार्पण रविवार को गजनेर के झंवर पैलेस सभागार में संपन्न हुआ। बीकानेर के गायत्री प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस कृति के विमोचन समारोह में साहित्य जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत की और बमचकरी की लेखनी को समकालीन समाज का आईना बताया।


लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि कवि एवं कथाकार राजेन्द्र जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि अपनी जन्मभूमि गजनेर से निकलकर साहित्य के बड़े मंचों तक पहुँचने वाले बाबूलाल छंगाणी अपनी पीढ़ी के इकलौते हास्य-व्यंग्य कवि हैं। उनकी कविताएँ शुद्ध हास्य के साथ-साथ समाज की विसंगतियों पर करारा कटाक्ष भी करती हैं, जो बीकानेर के लिए गौरव की बात है।


सहजता और संवेदन का संगम: वक्ताओं के विचार
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि छंगाणी को केवल हास्य तक सीमित करना उनके बहुआयामी सृजन के साथ न्याय नहीं होगा; उनकी रचनाओं में गहरी सामाजिक संवेदना छिपी है।
अन्य वक्ताओं ने भी छंगाणी के साहित्य पर अपने विचार रखे:
मनीषा आर्य सोनी: उन्होंने कहा कि छंगाणी की कविताएँ ग्रामीण परिवेश और आधुनिक समाज के घटनाक्रम को दर्पण की तरह दिखाती हैं।
हरीश बी. शर्मा: उन्होंने कवि के व्यवहार और सृजन की सहजता की सराहना करते हुए कहा कि इसमें रत्ती भर भी बनावटीपन नहीं है।
शंकरसिंह राजपुरोहित: उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि छंगाणी की कविताएँ फूहड़ता और द्विअर्थी संवादों से पूरी तरह मुक्त और प्रभावी हैं।
अपनों के बीच सम्मान और अपूर्व स्नेह
कार्यक्रम के दौरान कवि बाबूलाल छंगाणी भावुक नज़र आए। उन्होंने कहा कि बीकानेर के साहित्य जगत के मार्गदर्शन और उनके कविता कर्म ने उन्हें जीवन की हर परिस्थिति में ऊर्जा दी है। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक की प्रथम प्रतियाँ अपनी माताजी कमला देवी छंगाणी और अन्य गणमान्य परिजनों व सहयोगियों को भेंट कीं।
समारोह में डाक विभाग के अधीक्षक रामअवतार सोनी और पोस्टमास्टर विशाल भारद्वाज ने भी छंगाणी की कर्तव्यनिष्ठा और रचनात्मकता की प्रशंसा की।
साहित्यिक जगत की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का सफल संयोजन कवि-पत्रकार संजय आचार्य ‘वरुण’ ने किया, जबकि स्वागत उद्बोधन नवलाराम कुम्हार ने दिया। इस अवसर पर गायत्री प्रकाशन की ओर से ‘कथारंग’ का लोक विशेषांक भी वितरित किया गया। समारोह में डॉ. हरिदास हर्ष, पम्मी कोचर, कासिम बीकानेरी, और इरशाद अज़ीज़ सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गजनेर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में शायर इरशाद अज़ीज़ ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
