एसकेआरएयू में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का आगाज और विश्व दलहन दिवस पर मंथन

एसकेआरएयू में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का आगाज और विश्व दलहन दिवस पर मंथन
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बीकानेर, 10 फ़रवरी । स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में मंगलवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. बी. दुबे ने दीप प्रज्वलन कर शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. एच. एल. देशवाल, डॉ. वीर सिंह और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. परिमिता सहित विश्वविद्यालय का स्टाफ मौजूद रहा।

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कुलपति डॉ. दुबे ने एनएसएस स्वयंसेवकों को विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांव पेमासर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे ग्रामीणों, विशेषकर किसानों और महिलाओं को मोटे अनाज (मिलेट्स) के पोषक महत्व और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें। दल पेमासर पहुँचते ही स्वयंसेवकों ने स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर एक जागरूकता रैली निकाली, जिसमें ग्रामीणों को साफ-सफाई के प्रति संदेश दिया गया।

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विश्व दलहन दिवस: चने के उत्पादन में बीकानेर का बड़ा योगदान
इसी क्रम में, मंगलवार को ही विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केंद्र में ‘विश्व दलहन दिवस’ के अवसर पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने दलहनी फसलों की वैश्विक उपयोगिता और वर्तमान उत्पादन स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा की। उन्होंने बताया कि देश के कुल प्रजनक बीज उत्पादन में 25 प्रतिशत की बड़ी भागीदारी अकेले इसी विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बीजों की है। विशेष रूप से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित चने की किस्मों ने देश के कृषि परिदृश्य को नई मजबूती प्रदान की है।

परियोजना प्रभारी डॉ. एच. एल. देशवाल और डॉ. वीर सिंह ने दलहन की खेती में आने वाली चुनौतियों, जैसे कीट प्रबंधन और सुरक्षित भंडारण पर तकनीकी जानकारी साझा की। क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भूपेन्द्र सिंह ने चर्चा का समापन करते हुए कहा कि दालें न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाकर ‘टिकाऊ खेती’ का आधार भी तैयार करती हैं।

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