लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, संसद में बढ़ा राजनीतिक तनाव


नई दिल्ली/बीकानेर, 10 फ़रवरी । लोकसभा में मंगलवार को एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence motion) का औपचारिक नोटिस पेश कर दिया। कांग्रेस के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव पर विपक्षी गठबंधन के लगभग 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है और विपक्षी सदस्यों, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।


संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मर्यादा का सम्मान करते हुए, ओम बिरला ने एक बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार, जब तक इस अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, वे लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे और न ही स्पीकर की चेयर संभालेंगे। उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर या पैनल ऑफ चेयरमैन के सदस्य सदन का संचालन करेंगे। यह निर्णय उन्होंने पद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है।


चर्चा और आगामी कार्यक्रम
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर सदन में 9 मार्च को चर्चा होने की संभावना है। वर्तमान बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद सदन अवकाश पर रहेगा। बजट सत्र का दूसरा चरण 8 मार्च से पुनः शुरू होगा, जिसके अगले ही दिन इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर बहस और मतदान हो सकता है।
नोटिस के पीछे के प्रमुख कारण
विपक्ष ने अपने नोटिस में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- पक्षपात का आरोप: विपक्षी सांसदों का कहना है कि चेयर द्वारा सरकार का पक्ष लिया जा रहा है।
- बोलने से रोकना: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान बीच में टोकने या बोलने न देने की शिकायत।
- सांसदों का निलंबन: हाल ही में हुए 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर भी विपक्ष में गहरा रोष है।
संवैधानिक प्रक्रिया: कैसे हटते हैं स्पीकर?
सविंधान के अनुच्छेद 94(c) और लोकसभा नियमावली के नियम 200 के तहत स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया दी गई है:
14 दिन का नोटिस: प्रस्ताव पेश करने से कम से कम 14 दिन पहले लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
50 सांसदों का समर्थन: सदन में प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है (इस मामले में 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं)।
प्रभावी बहुमत: स्पीकर को हटाने के लिए सदन के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) की आवश्यकता होती है।


