“निराश्रितों के मसीहा थे मगन लाल चांडक”, सेवा और समर्पण के एक युग का अंत
"निराश्रितों के मसीहा थे मगन लाल चांडक", सेवा और समर्पण के एक युग का अंत


बीकानेर, 15 फरवरी। बीकानेर के प्रसिद्ध समाजसेवी और मानवता की सेवा के पर्याय रहे मगन लाल चांडक के निधन पर रविवार शाम जस्सूसर गेट के बाहर स्थित माहेश्वरी सदन में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में माहेश्वरी समाज सहित विभिन्न बिरादरियों और सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने नम आंखों से उन्हें याद करते हुए समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।


80 वर्ष की आयु में 11 फरवरी को अंतिम सांस लेने वाले मगन लाल चांडक पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से गरीबों, असहायों और निराश्रितों की सेवा में समर्पित थे। पूर्व पार्षद श्याम सुन्दर चांडक ने बताया कि मगन लाल जी ने अपना पूरा जीवन ‘श्री कृष्ण अन्न क्षेत्र’ के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रतिमाह राशन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने में लगा दिया। वे प्रीति क्लब और श्रीकृष्ण माहेश्वरी मंडल के संस्थापक भी रहे और धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रियता सदैव प्रेरणादायी रही।


सेवा में ही ‘मगन’ रहने वाले व्यक्तित्व के धनी
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने उन्हें एक ऐसा व्यक्तित्व बताया जो निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में ही ‘मगन’ रहता था। वक्ताओं ने कहा कि उनके जाने से बीकानेर के सामाजिक सेवा क्षेत्र में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ है, जिसे भरना कठिन है।
बाबू लाल मोहता और डॉ. नृसिंह बिनानी ने उनके संगठनात्मक कौशल को याद किया।
सुरेन्द्र शर्मा और पवन कुमार राठी ने उन्हें बेसहारों का सबसे मजबूत सहारा बताया।
नारायण बिहानी, नारायण डागा, हरि नारायण चांडक, ब्रज मोहन चांडक व शिव सोनी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने उनके जीवन आदर्शों को साझा किया।
सम्मानों से अलंकृत रहा जीवन का सफर
मगन लाल चांडक के सेवा कार्यों की गूंज न केवल समाज बल्कि शासन-प्रशासन तक भी रही। उन्हें जिला प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, रामदेवरा पैदल यात्री संघों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अनेक बार सम्मानित किया जा चुका था। उनकी सेवा का दायरा केवल अन्न वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि चिकित्सा और आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी उन्होंने गहरी छाप छोड़ी।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि उन्होंने समाज के हर वर्ग के दिल में अपनी जगह बनाई थी। सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। थार एक्सप्रेस परिवार उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है।
