नकली दूध का ‘असली’ खेल – टोंक में बड़ी कार्रवाई, सैंपल रिपोर्ट में हेरफेर करने पर FSO और 2 कॉन्स्टेबल गाज
टोंक में बड़ी कार्रवाई, सैंपल रिपोर्ट में हेरफेर करने पर FSO और 2 कॉन्स्टेबल गाज


टोंक, 19 फरवरी। राजस्थान के टोंक जिले में नकली दूध माफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मालपुरा उपखंड के डिग्गी कस्बे में चल रही नकली दूध फैक्ट्री के मामले में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। टोंक पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना ने दो पुलिस कॉन्स्टेबलों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) को एपीओ (APO) कर मुख्यालय रिपोर्ट करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई उस खुलासे के बाद हुई है जिसमें यह सामने आया कि जिस दूध को सरकारी लैब की रिपोर्ट में ‘शुद्ध’ बताया गया था, हकीकत में वह घातक रसायनों और रिफाइंड ऑयल से तैयार किया जा रहा था।


कैसे हुआ ‘सफेद जहर’ का पर्दाफाश?
गौरतलब है कि 2 जनवरी को जिला स्पेशल टीम (DST) और डिग्गी पुलिस ने एक बड़ी छापेमारी कर मिलावटी दूध बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था।


जब्ती: मौके से 5500 लीटर मिलावटी दूध, भारी मात्रा में सोयाबीन ऑयल, वनस्पति घी, दूध पाउडर और खतरनाक केमिकल बरामद किए गए थे।
गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर दूध से भरे टैंकर और 5 पिकअप गाड़ियां जब्त की थीं।
लैब रिपोर्ट और मिलीभगत पर खड़े हुए सवाल
विभागीय जांच में यह बेहद गंभीर तथ्य सामने आया कि छापेमारी से मात्र 10-11 दिन पहले खाद्य सुरक्षा अधिकारी मदन लाल गुर्जर ने इसी फैक्ट्री से दूध के 3-4 नमूने लिए थे। आश्चर्यजनक रूप से, उन नमूनों की सरकारी रिपोर्ट में दूध को ‘मानक के अनुरूप शुद्ध’ बताया गया था।
जांच का केंद्र: जब उसी स्थान से भारी मात्रा में मिलावट का सामान और केमिकल बरामद हुआ, तो यह स्पष्ट हो गया कि नमूनों के साथ या तो छेड़छाड़ की गई थी या रिपोर्ट गलत तैयार करवाई गई थी। इसी संदिग्ध भूमिका और लापरवाही के चलते पुलिसकर्मियों और खाद्य अधिकारी पर गाज गिरी है।
प्रशासन की ‘क्लीन स्वीप’ कार्रवाई
पुलिस विभाग: कॉन्स्टेबलों की संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर सूचना साझा न करने के आरोप में उन्हें सस्पेंड किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग: खाद्य सुरक्षा अधिकारी को पद से हटाकर (APO) उनके कार्यकाल की पिछली रिपोर्टों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
इस कार्रवाई से जिले के अन्य विभागों में भी हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासनिक बताया कारण
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग के जयपुर मुख्यालय ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी मदन लाल गुर्जर को एपीओ कर दिया। उनका मुख्यालय जयपुर किया गया है। हालांकि विभागीय आदेश में एपीओ का कारण प्रशासनिक बताया गया है, लेकिन मिलावटी दूध को सही बताने के प्रकरण को ही इस कार्रवाई की मुख्य वजह माना जा रहा है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि क्षेत्र में इतनी बड़ी गतिविधि लंबे समय से चल रही थी। सीएमएचओ शैलेंद्र चौधरी ने आदेश जारी होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी को कार्यमुक्त करते हुए जयपुर मुख्यालय के लिए रिलीव कर दिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इधर, पुलिस अधीक्षक ने नकली दूध बनाने की अवैध फैक्ट्री की जानकारी समय पर उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाने और प्रभावी निगरानी नहीं रखने पर स्थानीय आसूचना अधिकारी कांस्टेबल रामचरण और बीट कांस्टेबल सज्जनसिंह को निलंबित कर दिया है।
जयपुर, टोंक और अजमेर तक होता था सप्लाई
डिग्गी में पकड़ी गई फैक्ट्री से प्रति दिन 80 हजार लीटर नकली दूध जयपुर, अजमेर और टोंक जिले में सप्लाई किया जाता था। फैक्ट्री में सोयाबीन ऑयल, वनस्पति घी, स्किम्ड मिल्क पाउडर और केमिकल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जाता था। फैक्ट्री से 5 पिकअप, 2100 लीटर सोयाबीन ऑयल, 500 लीटर वनस्पति घी, 3000 किलो दूध पाउडर और 105 किलो कास्टिक सोडा जब्त किया गया था। पुलिस ने मौके से राजू, कालू, महिपाल, शिवराज और ओम प्रकाश को गिरफ्तार किया था। इस फैक्ट्री का संचालन बहरोड़ निवासी सोनू यादव कर रहा था, जिसकी तलाश जारी है।
