कर्मचारी हितों पर ‘कुठाराघात’- कमल नारायण आचार्य ने सचिवालय और निदेशालय के लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ मोर्चा खोला
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर, 19 फरवरी। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान-बीकानेर के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने मंत्रालयिक कर्मचारियों और अधिकारियों की पदोन्नति (DPC) में हो रहे अनावश्यक विलम्ब को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव सहित उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर आचार्य ने उन कार्मिकों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की मांग की है, जो अपनी सीटों पर बैठकर फाइलों को जानबूझकर अटका रहे हैं। आचार्य ने आरोप लगाया कि शासन सचिवालय और शिक्षा निदेशालय के कुछ कार्मिकों की ‘जुगलबंदी’ के कारण संस्थापन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों की डीपीसी की प्रक्रिया ठप पड़ी है।


सीटों पर जमे कार्मिकों पर मिलीभगत का आरोप
प्रदेशाध्यक्ष आचार्य ने पत्र में स्पष्ट किया कि निदेशालय द्वारा पदोन्नति के प्रस्ताव और मार्गदर्शन पत्र बहुत पहले ही भिजवाए जा चुके थे, लेकिन उन्हें सचिवालय और निदेशालय के स्तर पर रोक लिया गया है।


मिलीभगत का खेल: आचार्य ने दावा किया कि सचिवालय और निदेशालय के कुछ कार्मिक लंबे समय से एक ही सीट पर जमे हुए हैं और अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों के हितों का नुकसान हो रहा है।
बदलाव की मांग: संघ ने मांग की है कि ऐसे कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से उनकी सीटों से हटाया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।
31 मार्च तक का ‘अल्टीमेटम’
शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक शिथिलता दूर नहीं की गई, तो बड़ा आंदोलन होगा:
डेडलाइन: संघ की मांग है कि 31 मार्च 2026 तक प्रदेश के समस्त मंत्रालयिक कर्मचारियों और अधिकारियों की रिव्यू एवं नियमित डीपीसी (DPC) प्रक्रिया पूर्ण कर उन्हें राहत प्रदान की जाए।
चेतावनी: आचार्य ने कहा कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो संघ संगठनात्मक कार्यवाही (आंदोलन) के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राजस्थान सरकार और शिक्षा प्रशासन की होगी।
