

साध्वी ऋतंभरा और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने दी श्रद्धांजलि


बीकानेर, 26 फरवरी। विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की 60वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर गुरुवार को बीकानेर की धरा एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। वीर सावरकर पर्यावरण सेवा समिति द्वारा एम.एन. अस्पताल के सामने प्रदेश की संभवतः पहली अष्टधातु की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई, जिसका अनावरण प्रख्यात कथावाचक साध्वी ऋतंभरा के कर-कमलों द्वारा पूर्ण विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। इस गौरवशाली समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।



“सत्य पर अड़ने और तपने से बनता है कोई सावरकर”: अर्जुन राम मेघवाल
मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वीर सावरकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।
विपक्ष पर प्रहार: मेघवाल ने सावरकर के विरुद्ध टिप्पणी करने वाले दलों की निंदा करते हुए कहा कि सावरकर ने जेल की काल कोठरी में जो यातनाएं सहीं, वे राष्ट्र के प्रति उनके अगाध प्रेम का प्रमाण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से ही संसद के सेंट्रल हॉल में सावरकर की प्रतिमा लगी थी और आज बीकानेर में अष्टधातु प्रतिमा का लगना ऐतिहासिक है। उन्होंने सावरकर द्वारा जेल में साक्षरता की अलख जगाने और बाबा साहब अंबेडकर द्वारा उनके बचाव के प्रसंगों की भी चर्चा की।
“राष्ट्रभक्ति का नशा करें युवा”: साध्वी ऋतंभरा का आह्वान
अनावरणकर्ता साध्वी ऋतंभरा ने सावरकर को स्वतंत्रता संग्राम का दैदीप्यमान नक्षत्र बताया। उन्होंने कहा कि सावरकर की विचारधारा को मौत कभी नहीं मार सकती क्योंकि उन्होंने धर्म और संस्कृति के लिए जीना सिखाया।
उन्होंने युवा शक्ति से अपील की कि वे नशे की बुराइयों से दूर रहकर सावरकर की तरह ‘राष्ट्रभक्ति का नशा’ करें। सावरकर का व्यक्तित्व आत्म-नियंत्रण और संकल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सेल्यूलर जेल की यातनाएं और समरसता का संकल्प
समारोह के मुख्य वक्ता आरएसएस के विभाग प्रचारक विनायक जी व टेकचंद बरड़िया ने सावरकर के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह रत्नागिरी के पतित पावन मंदिर में सावरकर ने सभी जातियों का प्रवेश सुनिश्चित कर समरसता की अलख जगाई थी। बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी ने सावरकर को एक ‘इतिहास पुरुष’ बताते हुए उनके मानसिक साहस को याद किया। इस दौरान टेक चंद बरड़िया और डाॅ. सत्यप्रकाश आचार्य ने वीर सावरकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सावरकर जैसे महापुरूष, सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। इनके प्रति सच्ची श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव रखना हमारा दायित्व है।
पर्यावरण संरक्षण: खेजड़ी का रोपण और समाज सेवा
संस्था के संस्थापक उम्मेद सिंह राजपुरोहित ने अतिथियों का स्वागत किया और समिति द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी दी।
पर्यावरण का संदेश: अनावरण के पश्चात साध्वी ऋतंभरा ने राज्य वृक्ष खेजड़ी का पौधा लगाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
निशुल्क सेवा संकल्प: इस अवसर पर राजेंद्र राजपुरोहित की स्मृति में पीबीएम नेत्र चिकित्सालय में निरंतर निशुल्क काले चश्मे उपलब्ध करवाने का संकल्प लिया गया। साथ ही निशक्तजन मांगीलाल राजपुरोहित का सम्मान भी किया गया। वीर सावरकर पर्यावरण सेवा समिति के संरक्षक नरेंद्र सिंह बीका ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़, श्याम पंचारिया, मोहन सुराणा , नारायण चोपड़ा , महावीर रांका, कर्नल हेम सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह, मदन मोदी, मनीष आचार्य, सरिता नाहटा , और नरेंद्र सिंह बीका सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और मातृशक्ति उपस्थित रही। कार्यक्रम का सफल संचालन किशोर राजपुरोहित ने किया।

