बीज उत्पादन में किसानों को ‘एंटरप्रेन्योर’ बनाने पर जोर, SKRAU में 75 किसानों को मिला प्रशिक्षण

बीज उत्पादन में किसानों को 'एंटरप्रेन्योर' बनाने पर जोर, SKRAU में 75 किसानों को मिला प्रशिक्षण
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  • बाजरा राजस्थान की पहचान

बीकानेर, 7 मार्च । पश्चिमी राजस्थान के किसानों की आय बढ़ाने और बाजरा उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में शनिवार को विशेष कृषि प्रशिक्षण एवं आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र सरकार की अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के 75 किसानों ने आधुनिक खेती के गुर सीखे।

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बाजरे के साथ काचरी बीज उत्पादन की भी संभावनाएं: कुलगुरु
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलगुरु डॉ. आर. बी. दुबे ने कहा कि बाजरा राजस्थान की सांस्कृतिक और कृषि पहचान है। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि वे किसानों को केवल फसल उगाना ही नहीं, बल्कि बीज उत्पादन (Seed Production) के लिए भी प्रशिक्षित करें। डॉ. दुबे ने कहा, “जब किसान स्वयं उच्च गुणवत्ता वाले और रोग प्रतिरोधक किस्मों के बीज तैयार करेगा, तभी वह सही मायनों में आत्मनिर्भर बनेगा।” उन्होंने क्षेत्र में काचरी के बीज की बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों को इसके उत्पादन में भी आगे आने का आह्वान किया।

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सीड एंटरप्रेन्योर बनें युवा किसान: डॉ. एन. के. शर्मा
अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बाजरा अन्य मिलेट फसलों की तुलना में कम जोखिम वाली और अधिक पोषण युक्त फसल है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में संकर बाजरे का बीज राज्य के बाहर से आता है। उन्होंने युवा किसानों से अपील की कि वे ‘सीड एंटरप्रेन्योर’ (बीज उद्यमी) के रूप में अपनी पहचान बनाएं और स्वयं अपने खेतों में हाइब्रिड बीज तैयार करें।

विशेषज्ञों ने दिए फसल प्रबंधन के टिप्स
प्रशिक्षण सत्र के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. पी. सी. गुप्ता, डॉ. भूपेन्द्र सिंह, डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. एस. पी. सिंह और डॉ. परमेन्द्र सिंह ने किसानों को बाजरे की नई किस्मों, उर्वरक प्रबंधन और फसल सुरक्षा की तकनीकी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को उन्नत कृषि आदान (बीज व अन्य सामग्री) वितरित किए गए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. बी. एस. नाथावत ने किया और डॉ. भूपेंद्र सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

 

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