बीकानेर में ‘ब्लू ई-बस’ सेवा का आगाज जल्द, 75 इलेक्ट्रिक बसें भरेंगी रफ्तार
बीकानेर में 'ब्लू ई-बस' सेवा का आगाज जल्द, 75 इलेक्ट्रिक बसें भरेंगी रफ्तार


- दिव्यांगों के लिए लिफ्ट और महिलाओं के लिए पिंक सीटें होंगी खास
बीकानेर, 19 मार्च । बीकानेर शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की तैयारी अंतिम चरण में है। नगर निगम बीकानेर और सीएसएल मोबिलिटी कंपनी के संयुक्त प्रयासों से शहर की सड़कों पर जल्द ही नीले रंग की अत्याधुनिक ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रथम चरण में 75 बसों के संचालन के साथ जून 2026 तक इस सेवा को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कुल 125 बसों का बेड़ा शहर को मिलेगा।


रूट फाइनल करने की प्रक्रिया तेज, आयुक्त ने की समीक्षा
नगर निगम आयुक्त मयंक मनीष ने बुधवार को ई-बस संचालन करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इससे पूर्व कंपनी के प्रतिनिधि धीरज पाराशर ने महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के सामने निर्माणाधीन ई-बस डिपो का निरीक्षण किया। निगम ने शहर के प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को जोड़ने के लिए रूट तय करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है।


सुरक्षा और तकनीक: गेट बंद होने पर ही बढ़ेगी बस
इन 9 मीटर लंबी ई-बसों को सुरक्षा के कड़े मानकों के साथ तैयार किया गया है:
स्मार्ट सेंसर: बस का दरवाजा पूरी तरह बंद होने के बाद ही वह आगे बढ़ सकेगी। तापमान बढ़ने की स्थिति में ऑटोमैटिक अलार्म सिस्टम सक्रिय हो जाएगा।
डिजिटल निगरानी: प्रत्येक बस GPS से लैस होगी और सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए जाएंगे।
25+15 की क्षमता: बस में 25 यात्रियों के बैठने और 15 के खड़े रहने की पर्याप्त जगह होगी।
दिव्यांगों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं
बीकानेर की ई-बसें समावेशी परिवहन का उदाहरण पेश करेंगी:
दिव्यांग मित्र: प्रत्येक बस में एक व्हील चेयर उपलब्ध रहेगी। साथ ही, दिव्यांग यात्रियों के लिए बस में विशेष लिफ्ट लगाई गई है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के बस के भीतर प्रवेश कर सकेंगे।
पिंक सीटें: महिला यात्रियों के सम्मान और सुविधा के लिए प्रत्येक बस में 4 सीटें आरक्षित होंगी, जिन्हें अलग पहचान देने के लिए पिंक (गुलाबी) रंग में रंगा जाएगा।
पर्यावरण और जेब दोनों को राहत
वातानुकूलित (AC) ई-बसें चलने से बीकानेर की आबोहवा में सुधार होगा। ये बसें पूरी तरह शोरमुक्त होंगी, जिससे ध्वनि प्रदूषण कम होगा। साथ ही, डीजल की तुलना में कम संचालन लागत होने के कारण आम जनता को सस्ती और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से यात्रियों को अगले स्टॉपेज की जानकारी भी मिलती रहेगी।
