महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस
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quicjZaps 15 sept 2025
  • जैव विविधता पर वैश्विक प्रभाव’ विषय पर ग्रामीणों को किया जागरूक

बीकानेर, 23 मई। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU), बीकानेर और राजस्थान राज्य जैव विविधता मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य थार मरुस्थल की जैव विविधता का संरक्षण और स्थानीय समुदायों को इस वैश्विक संकट के प्रति सचेत करना था।

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जंगलों का यथावत रहना ही वास्तविक विकास: कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने उपस्थित ग्रामीणों और विद्यार्थियों से जैव विविधता के संरक्षण हेतु सामूहिक साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने थार के पारिस्थितिकी तंत्र में छोटे कीट-पतंगों, टिड्डियों, तितलियों से लेकर रेगिस्तानी पशुओं और वृक्षों की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्हें ‘रेगिस्तान की असली पहचान’ बताया।

आचार्य दीक्षित ने मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण को पहुँच रहे नुकसान की कड़ी निंदा की और कहा कि असली विकास जंगलों को नष्ट करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना है। उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय परिसर में एक जैव विविधता पार्क विकसित किया गया है, जहाँ वन्य जीवों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

थार की जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन पर मंथन

पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से थार मरुस्थल के संकटग्रस्त पशुओं, पादपों और जल संरक्षण की प्राचीन व आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नाल बड़ी, नोखा दहिया, नापासर, किल्चू और कल्याणसर जैसे आस-पास के गांवों से आए ग्रामीणों को खेती के बदलते स्वरूप और जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति प्रेरित किया।

शुष्क बागवानी केंद्र से पधारे प्रो. धूरेन्द्र सिंह ने फसलों की विविधता और उत्पादन की उन्नत तकनीकों के बारे में जानकारी साझा की। वहीं, जिला वन अधिकारी संदीप कुमार छलाणी और सहायक वन संरक्षक डॉ. पूजा पंचारिया ने पेटेंट, बायोडायवर्सिटी रजिस्टर और बायोपायरेसी जैसे जटिल लेकिन महत्वपूर्ण विषयों पर ग्रामीणों को जागरूक किया।

स्थानीय स्तर पर प्रयास की आवश्यकता
कार्यक्रम की आयोजक सचिव डॉ. लीला कौर ने मंच संचालन करते हुए बताया कि वैश्विक प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना अनिवार्य है। समापन सत्र में प्रो. राजाराम चोयल ने जैव विविधता की निगरानी के लिए ‘पर्यावरण सहायक’ के पद को महत्वपूर्ण बताया और वन विभाग से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

विशेष आकर्षण

राजस्थानी कविता: अतिथि शिक्षक रामोवतार उपाध्याय ने राजस्थानी भाषा में जैव विविधता पर ओजपूर्ण कविता पाठ कर ग्रामीणों को अपनी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ने का संदेश दिया।

ग्रामीण सहभागिता: कार्यक्रम में उदासर, कोटड़ी, स्वरूपदेसर आदि गांवों के निवासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए।

इस अवसर पर वित्त नियंत्रक देवेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. प्रकाश सारण, डॉ. सुरेंद्र गोदारा, डॉ. गौतम मेघवंशी सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी और शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रियंका जांगिड़, प्रमिला सोलंकी और जयकिशन छंगाणी सहित विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा।

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