अफसरों के पर्सनल फोन बिल के सरकारी भुगतान पर लगी रोक, बिना अनुमति क्लेम उठाने पर होगी कार्रवाई

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  • राजस्थान सरकार की बड़ी सख्ती

जयपुर, 9 जून। राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक अमले में हो रही वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी फोन (मोबाइल व घरेलू लैंडलाइन) का बिल सरकारी खाते से नहीं भरवा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में नई गाइडलाइन जारी करते हुए निजी फोन बिलों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार ने साफ किया है कि यदि बिना पूर्व अनुमति के ऐसे किसी बिल का भुगतान किया गया, तो संबंधित के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने की कवायद

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दरअसल, सरकार के संज्ञान में आया था कि राज्य में कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपने आधिकारिक (ऑफिशियल) फोन के अलावा घरों पर लगे निजी लैंडलाइन और पर्सनल मोबाइल नंबरों के बिल भी सरकारी मद से भुगत रहे थे। इस वित्तीय गड़बड़ी को रोकने के लिए विभाग ने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, जिस पद और स्थान के लिए टेलीफोन स्वीकृत हुआ है, उसका उपयोग केवल वही अधिकारी कर सकेगा जो वर्तमान में उस पद पर कार्यरत है। ट्रांसफर, पदोन्नति (प्रमोशन) या सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की स्थिति में उस टेलीफोन को तुरंत विभागीय नियंत्रण में वापस सौंपना होगा।

अब तबादले के बाद भी सरकारी फोन अपने पास रखना, निजी नंबरों का बिना अनुमति सरकारी भुगतान उठाना और महीनों तक बिल पेंडिंग छोड़ना अधिकारियों के लिए भारी पड़ेगा।

बिना सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति के नहीं होगा भुगतान

सरकार द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, सरकारी आवासों या कार्यालयों में लगे वैध कनेक्शनों का नियमित भुगतान तो अनिवार्य रहेगा ताकि लेट फीस (सरचार्ज) का अतिरिक्त बोझ न पड़े और कनेक्शन कटने की नौबत न आए। लेकिन, यदि कोई अधिकारी अपने किसी निजी टेलीफोन या मोबाइल को सरकारी उपयोग में बताकर उसका रीइंबर्समेंट (भुगतान) चाहता है, तो उसे पहले सामान्य प्रशासन विभाग से लिखित अनुमति लेनी होगी। बिना पूर्व स्वीकृति के किसी भी निजी नंबर के बिल का क्लेम पास नहीं किया जाएगा।

6 महीने की समय सीमा तय, देरी पर डूबेगा क्लेम

नए नियमों के तहत बिल क्लेम करने की समय सीमा भी तय कर दी गई है। यदि कोई अधिकारी टेलीफोन या मोबाइल बिल के क्लेम का दावा अपने कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से 6 महीने के भीतर प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसे पिछली अवधि का कोई वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा। ऐसे विलंबित मामलों में भुगतान केवल आवेदन करने की तारीख से ही मान्य माना जाएगा। इस नए आदेश से सचिवालय से लेकर जिला स्तर के कार्यालयों में खलबली मच गई है।

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