प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी की पुस्तक ‘युवा उड़ान’ का भव्य लोकार्पण
प्रोफेसर डॉ नरसिंह बिनानी की किताब युवा उड़ान का ग्रैंड लॉन्च


- वक्ताओं ने कहा—सपनों को दृढ़ संकल्प से साकार करें युवा
बीकानेर , 7 सितंबर । माहेश्वरी सभा (शहर) बीकानेर और बीजेएस रामपुरिया जैन कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी द्वारा रचित और विकास पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रेरणादायी पुस्तक ‘युवा उड़ान’ (मोटिवेशनल आर्टिकल्स) का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। रामपुरिया कॉलेज परिसर (मूर्ति सर्किल) में आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम का संरक्षण वयोवृद्ध प्रोफेसर सुमेर चंद जैन ने किया, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. उमाकांत गुप्त ने की।


अतिथियों एवं वक्ताओं के प्रमुख विचार


समारोह के संरक्षक पूर्व प्रिंसिपल और लायंस क्लब के पूर्व प्रांतपाल वयोवृद्ध प्रोफेसर सुमेर चंद जी जैन ने अपने आशीर्वचन दिए । मंच सहित सभी उपस्थितजनों ने बीकानेर में “सुमेर जी सर” नाम से विख्यात वयोवृद्ध प्रोफेसर सुमेर चंद जी जैन का खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया ।
प्रोफेसर डॉ. उमाकांत गुप्त (अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि ‘युवा उड़ान’ युवाओं के साथ-साथ शिक्षकों और बुजुर्गों के लिए भी समान रूप से उपयोगी है। यह पुस्तक युवाओं को कठिनाइयों से घबराने के बजाय आत्मविश्वास से आगे बढ़ने और शिक्षकों को सही मार्गदर्शन देने की प्रेरणा देती है।
दीपक अग्रवाल (मुख्य अतिथि व चेयरमैन, बीकाजी ग्रुप): उन्होंने कहा कि युवा अपने सपनों को दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयासों से साकार कर सकते हैं। यह पुस्तक युवाओं के लिए प्रेरणा की एक नई आवाज बनेगी।
सुनील सारड़ा (मुख्य अतिथि व अध्यक्ष, माहेश्वरी सभा बीकानेर): उन्होंने युवाओं को सदैव सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी और पुस्तक को सोच बदलने में अत्यंत उपयोगी बताया।
राजेन्द्र जोशी व कमल रंगा (विशिष्ट अतिथि): वरिष्ठ साहित्यकारों ने पुस्तक को युवाओं के लिए सफलता की मार्गदर्शिका बताया, जो उन्हें लक्ष्य निर्धारित करने और अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का संदेश देती है।
प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी (लेखक): डॉ. बिनानी ने कहा कि
इस अवसर पर अपनी पुस्तक पर विचार रखते हुए प्रोफेसर डॉ. बिनानी ने कहा कि वर्तमान दौर प्रतिस्पर्धा का है । आज अनेक युवा बेरोजगारी का शिकार है । युवाओं को रोजगार- स्वरोजगार प्राप्त करने में मार्गदर्शन देने की दृष्टि से यह पुस्तक लिखी गई है । उन्होंने बताया कि इस समय युवा वर्ग को नवीनतम इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी और कम्यूनिकेशन का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए ।
डॉ. बिनानी ने कहा कि युवाओं को अपनी सोच व सपनों को ऊँचा रखना चाहिए । उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता के कुछ श्लोकों के माध्यम से युवाओं को शिक्षाएं ग्रहण करने की सलाह दी । उन्होंने “उड़ते वे ही हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंख से होता है क्या हौंसलों से उड़ान होती है” दोहे की पंक्तियों से सीख लेते हुए युवाओं को अपने कैरियर में सफलता के लिए हौंसला बनाए रखने का आव्हान किया ।
पुस्तकीय टीप (शंकर सिंह राजपुरोहित व डॉ. कृष्णा गहलोत): समीक्षा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह कृति युवाओं के भीतर छिपी असीमित ऊर्जा को जगाने वाली, आत्मविश्वास भरने वाली तथा कैरियर निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी और पठनीय है।
समारोह के मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और उत्तम सेठिया द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत स्वागताध्यक्ष राजाराम स्वर्णकार ने किया। इस अवसर पर लेखक डॉ. बिनानी का विभिन्न सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं की ओर से अभिनंदन भी किया गया।
समारोह का सफल संचालन इंजी. गिरिराज पारीक ने किया तथा डॉ. शालिनी आरी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
